दोहा समझौता। इमेज-एआई
What Is Doha Agreement : पाकिस्तान ने हाल ही में अफगानिस्तान के सीमाई इलाकों में सात ठिकानों पर हमले किए हैं, जिसमें कई आम नागरिक मारे गए हैं। पाकिस्तान का दावा है कि ये हमले उसकी सुरक्षा विफलताओं को छिपाने के लिए नहीं थे, बल्कि आत्मघाती हमलों के जवाब में थे, जिनकी जिम्मेदारी पाकिस्तानी तालिबान और इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) ने ली थी। इन हमलों के बाद, पाकिस्तान को तालिबान की जवाबी कार्रवाई का डर सता रहा है, जिसने सही समय पर जवाब देने की धमकी दी है।
हमले के बाद, पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तालिबान पर दबाव बनाने की अपील कर रहा है। पाकिस्तान ने दोहा समझौते का हवाला दिया है, जिसमें तालिबान ने अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए न करने की प्रतिबद्धता जताई थी। हालांकि, दोहा समझौता अमेरिका और तालिबान के बीच हुआ था, और पाकिस्तान इसका सीधा पक्षकार नहीं था। इससे ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने खुद को पीड़ित के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।
दोहा समझौते के तहत अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपनी और नाटो सेना की वापसी का वादा किया था, जिसके बदले में तालिबान ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी समूहों को अपनी जमीन का इस्तेमाल करने से रोकने का वादा किया था। समझौते में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सुरक्षा संबंधी चर्चाओं को बढ़ावा देने का भी जिक्र था।
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अब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगानिस्तान पर दोहा समझौते का पालन करने के लिए दबाव बनाने का आग्रह कर रहा है, जबकि वह खुद इस समझौते का सीधा पक्षकार नहीं है। यह देखना बाकी है कि तालिबान इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया देता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति से कैसे निपटता है। बता दें, इसी तरह पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान काफी घबरा गया था। उसने दोनों देशों के बीच संघर्षों को रोकने के लिए अमेरिका से कई बार अपील की थी। उसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच शांति बहाल हुई थी।