वेनेजुएला के क्रूड ऑयल को लेकर परेशान महाशक्तियां, (डिजाइन फोटो)
Which Type Crude Oil In Venezuela: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर हालिया अमेरिकी कार्रवाई ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में हलचल पैदा कर दी है। दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक होने के बावजूद अमेरिका की नजरें वेनेजुएला के ‘खास’ तेल पर टिकी रहती हैं। यह केवल राजनीति नहीं बल्कि तेल की एक जटिल रासायनिक और आर्थिक कहानी है।
आमतौर पर माना जाता है कि कच्चा तेल एक जैसा ही होता है लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। तेल की गुणवत्ता का आकलन उसकी API ग्रेविटी और सल्फर की मात्रा से किया जाता है।
हल्का कच्चा तेल अपेक्षाकृत पतला होता है और रिफाइनिंग में आसान माना जाता है जिससे पेट्रोल और विमान ईंधन जैसी उच्च मूल्य की चीजें ज्यादा निकलती हैं। इसके उलट, वेनेजुएला का कच्चा तेल भारी और एक्स्ट्रा-हैवी श्रेणी में आता है। कई मामलों में इसकी API ग्रेविटी 10 से भी कम होती है, जिससे यह इतना गाढ़ा हो जाता है कि इसे जमीन से निकालना और बहाना भी मुश्किल हो जाता है।
वेनेजुएला की असली ताकत उसकी ओरिनोको ऑयल बेल्ट में छिपी है जिसे दुनिया के सबसे बड़े तेल क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां लगभग 303 अरब बैरल का प्रमाणित तेल भंडार मौजूद है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा है। यह संसाधन आने वाले कई दशकों तक दुनिया की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकता है।
हालांकि, इस अत्यधिक गाढ़े तेल को निकालना और उसे उपयोग योग्य ईंधन में बदलना आसान नहीं है। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक और महंगे अपग्रेडिंग प्लांट्स की जरूरत होती है, जिससे लागत काफी बढ़ जाती है।
वेनेजुएला के क्रूड ऑयल के बारे में समझें
अब यह सवाल अक्सर उठता है कि जब अमेरिका खुद रिकॉर्ड स्तर पर तेल उत्पादन कर रहा है, तो उसे वेनेजुएला के तेल में दिलचस्पी क्यों है? इसका जवाब अमेरिकी रिफाइनरियों की संरचना में छिपा है। अमेरिका की गल्फ कोस्ट स्थित लगभग 70 प्रतिशत रिफाइनरियां भारी और सॉर क्रूड को प्रोसेस करने के हिसाब से डिजाइन की गई हैं।
शेल ऑयल क्रांति के बाद भले ही अमेरिका में हल्के तेल की भरमार हो गई हो, लेकिन उसकी रिफाइनरियां अब भी भारी तेल पर निर्भर हैं। वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगने के बाद अमेरिकी कंपनियों को कनाडा और मेक्सिको से महंगे दामों पर तेल खरीदना पड़ा।
वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA कभी दुनिया की सबसे ताकतवर कंपनियों में शामिल थी, लेकिन 2007 में हुए राष्ट्रीयकरण और लंबे समय तक निवेश की कमी ने इसकी हालत खराब कर दी। इसके बाद 2019 में लगाए गए कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों ने हालात और बिगाड़ दिए।
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तकनीक और अंतरराष्ट्रीय वित्त तक पहुंच बंद होने से उत्पादन 30 लाख बैरल प्रतिदिन से गिरकर 10 लाख बैरल से भी नीचे आ गया। 2023 में अमेरिकी कंपनी शेवरॉन को सीमित छूट मिलने से कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन 2025 में दोबारा सख्त हुए प्रतिबंधों के कारण वैश्विक बाजार में डीजल और फ्यूल ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा फिर से गहराने लगा है।
Ans: क्योंकि इसकी API ग्रेविटी 10 से कम होती है, जिससे यह अत्यधिक गाढ़ा और चिपचिपा होता है और आसानी से नहीं बहता।
Ans: हां, वेनेजुएला के पास लगभग 303 बिलियन बैरल का प्रमाणित तेल भंडार है, जो दुनिया में सर्वाधिक है।
Ans: क्योंकि अमेरिका की 70% रिफाइनिंग क्षमता भारी तेल (Heavy Crude) को प्रोसेस करने के लिए ही बनी है।