ग्रीनलैंड पर महाजंग! ट्रंप ने दिया 20 दिन का अल्टीमेटम, क्या अपनों से ही भिड़ेगा अमेरिका?
World War III threat: डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को हथियाने की जिद ने नाटो देशों के साथ युद्ध की स्थिति पैदा कर दी है। 20 दिनों का अल्टीमेटम खत्म होते ही तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडरा रहा है।
- Written By: अमन उपाध्याय
ग्रीनलैंड पर ट्रंप की नजर, (डिजाइन फोटो)
US Greenland Conflict Latest News In Hindi: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक महत्वाकांक्षा ने अमेरिका को एक ऐसे खतरे में डाल दिया है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। खबर है कि अमेरिका को रूस या चीन जैसे दुश्मन देशों से पहले अपने ही 31 सहयोगियों, यानी नाटो (NATO) देशों से लड़ना पड़ सकता है। इस पूरे विवाद की जड़ में है ग्रीनलैंड, जिसे हथियाने के लिए ट्रंप ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
ट्रंप ने दिया 20 दिनों का अल्टीमेटम
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर 20 दिनों का अल्टीमेटम जारी किया है। एक उच्च स्तरीय डिफेंस मीटिंग में ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि वे ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाने के लिए हथियारों का इस्तेमाल करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। ट्रंप की इस जिद ने वाशिंगटन के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है और इसे जनवरी के अंत तक एक युद्ध की स्थिति के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है नाटो का ‘अनुच्छेद-5’?
अमेरिका ने 1949 में जिस नाटो संगठन को सोवियत संघ के खिलाफ कवच के रूप में बनाया था आज वही उसके लिए सिरदर्द बन गया है। डेमोक्रेट सांसदों की बैठक में सांसद जेफ्रीज ने आगाह किया कि अगर अमेरिका डेनमार्क के क्षेत्र ग्रीनलैंड में घुसपैठ करता है, तो यह नाटो चार्टर के अनुच्छेद-5 का सीधा उल्लंघन होगा।
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नाटो का यह नियम कहता है कि किसी एक सदस्य देश (जैसे डेनमार्क) पर हमला, सभी 32 सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा। ऐसी स्थिति में ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे देश कानूनी रूप से अमेरिका के खिलाफ युद्ध लड़ने के लिए मजबूर होंगे। डेनमार्क ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर कोई भी हमला नाटो के अस्तित्व को खत्म कर सकता है।
अमेरिका के लिए कितनी भारी पड़ेगी यह जंग?
अगर ट्रंप पीछे नहीं हटते हैं, तो अमेरिका कूटनीतिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर अलग-थलग पड़ जाएगा। नाटो के अधिकांश देश यूरोप से हैं, और ब्रिटेन व फ्रांस के पास परमाणु हथियार भी हैं। यदि अमेरिका अपने इन पुराने साथियों को खो देता है, तो यूरोप और मध्य पूर्व में उसका दबदबा खत्म हो जाएगा।
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इस स्थिति का सबसे ज्यादा फायदा रूस और चीन को होगा, जो पहले से ही अमेरिका के विरोध में खड़े हैं और परमाणु शक्ति संपन्न हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति सीधे तौर पर तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हो सकती है, जहाँ अमेरिका को अपनों से ही अपनों की जमीन के लिए लड़ना होगा।
