एक जहाज को लेकर भिड़ गईं महाशक्तियां, US-रूस में तनातनी तेज, क्या 'Bella 1' को लेकर छिड़ेगी महाजंग?

Russia US Tension: US ने रूसी तेल टैंकर बेला 1 को जब्त कर लिया है। जिसके बाद अवैध तेल तस्करी के आरोपों के बीच रूस ने इसे 'समुद्री डकैती' बता दिया है जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया है।
Putin's tensions rise! The US has seized a Russian ship in the middle of the sea. Will the "Bella 1" incident trigger a major conflict?
'Bella 1' को लेकर रूस-अमेरिका में बढ़ी टेंशन, (डिजाइन फोटो)
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Russia Ship Seizure News In Hindi: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर रूस और अमेरिका के बीच तलवारें खिंच गई हैं। मामला एक पुराने और जंग लगे तेल टैंकर 'मैरिनेरा' का है, जिसे पहले 'बेला 1' के नाम से जाना जाता था। अमेरिकी सेना ने उत्तरी अटलांटिक महासागर में आइसलैंड के तट से लगभग 190 मील दूर इस रूसी झंडे वाले जहाज पर चढ़कर उसे जब्त कर लिया है।

सवाल यह उठता है कि एक खाली और पुराने जहाज के पीछे दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली देश क्यों खड़े हैं? अमेरिकी दावों के मुताबिक, यह जहाज उन 'शैडो फ्लीट' टैंकरों का हिस्सा है, जो अवैध रूप से ईरानी तेल की ढुलाई में लगे हुए थे। अमेरिका ने इस जहाज को साल 2024 में ही प्रतिबंधित (Ban) कर दिया था। हालांकि, शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, जब्ती के समय यह जहाज पूरी तरह खाली था।

हाई-वोल्टेज ड्रामा और अंतरराष्ट्रीय साजिश

इस जब्ती की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। पिछले महीने जब यह जहाज वेनेजुएला की ओर जा रहा था, तब इस पर गुयाना का झंडा लगा था। अमेरिकी कोस्ट गार्ड की नजर पड़ते ही क्रू ने दिशा बदल दी और पकड़े जाने से बचने के लिए जहाज पर रूसी झंडा पेंट कर दिया। रूस ने अपने इस टैंकर को बचाने के लिए समंदर में पनडुब्बी और नौसेना तक तैनात कर दी थी।

ब्रिटेन की मदद और सैन्य ऑपरेशन

इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए अमेरिका ने ब्रिटेन की धरती का इस्तेमाल किया। रिपोर्टों के मुताबिक, V-22 ऑस्प्रे विमान और AC-130 गनशिप ब्रिटेन के सैन्य ठिकानों से सक्रिय थे। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने भी स्वीकार किया है कि उसने अमेरिका के अनुरोध पर इस जब्ती अभियान में पूरी मदद की है।

रूस और चीन का कड़ा विरोध

इस घटना के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बेहद नाराज बताए जा रहे हैं। रूस ने जहाज पर सवार अपने नागरिकों की तुरंत वापसी की मांग की है। रूसी सांसद लियोनिद स्लुत्स्की ने इस कार्रवाई को '21वीं सदी की समुद्री डकैती' और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।वहीं, चीन ने भी अमेरिका की निंदा करते हुए इसे एकतरफा प्रतिबंधों की दादागिरी करार दिया है। रूस का तर्क है कि 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन के तहत किसी भी देश को दूसरे देश के पंजीकृत जहाज पर बल प्रयोग का अधिकार नहीं है।

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