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ड्रग्स कॉर्टेल या तेल का खेल? ट्रंप का ‘मास्टरप्लान’ है वेनेजुएला पर अटैक, भारत के ऊपर भी भयानक संकट

US airstrikes Venezuela: वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले ने एक पुराने सवाल को फिर से जिंदा कर दिया है। सवाल ये कि US वाकई ड्रग्स के खिलाफ लड़ रहा है, या फिर उसकी नजर दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार पर है?

  • By अभिषेक सिंह
Updated On: Jan 03, 2026 | 04:30 PM

डोनाल्ड ट्रंप व निकोलस मादुरो (डिजाइन फोटो)

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America attacks Venezuela: दुनिया का ध्यान इस समय अचानक मध्य-पूर्व के तनाव से हटकर लातिन अमेरिका की ओर मुड़ गया है। शनिवार की सुबह वेनेजुएला की राजधानी काराकस अमेरिका के भीषण हवाई हमलों से दहल उठी। कम ऊंचाई पर उड़ते अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने एक के बाद एक कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

पिछले 24 घंटों में अमेरिका ने जिस तरह वेनेजुएला के तट पर अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाई हैं, उसने एक पुराने और गंभीर सवाल को फिर से जिंदा कर दिया है। सवाल यह कि क्या अमेरिका वाकई ड्रग्स के खिलाफ लड़ रहा है, या फिर उसकी नजर दुनिया के सबसे बड़े तेल खजाने पर है? आइए समझते हैं कि वेनेजुएला में अभी क्या हो रहा है और यह भारत के लिए चिंता का विषय क्यों है?

अमेरिका ने कहां-कहां बरसाए बम?

राजधानी काराकस में रात के अंधेरे में कम से कम सात बड़े धमाकों की आवाज सुनी गई, जिसके बाद स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। वेनेजुएला सरकार ने आधिकारिक पुष्टि की है कि अमेरिका ने काराकस के अलावा मिरांडा, अरागुआ और ला गुएरा राज्यों में भी नागरिक और सैन्य ठिकानों पर बमबारी की है।

मादुरो ने घोषित किया आपातकाल

राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने इसे सीधे तौर पर बाहरी आक्रमण घोषित करते हुए देश पर इमरजेंसी का ऐलान कर दिया है। सरकार ने आरोप लगाया कि इन हमलों का एकमात्र मकसद वेनेजुएला के विशाल तेल और खनिज संसाधनों पर कब्जा करना है। मादुरो ने आक्रमण की स्थिति देखते हुए नागरिक अधिकारों को निलंबित करने और सशस्त्र बलों की भूमिका बढ़ाने के आदेश दे दिए हैं। वहीं, वेनेजुएला में हुए इस हमले ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है।

आधी रात को हुआ अमेरिकी अटैक

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, पहला धमाका रात करीब 2 बजे सुना गया। इसके बाद राजधानी और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। सरकार ने अपने समर्थकों से अपील की है कि वे इस साम्राज्यवादी हमले के खिलाफ सड़कों पर उतरें और देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए एकजुट हों। हालांकि, वाइट हाउस की ओर से इस पूरे मामले पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स ने कई बड़े खुलासे किए हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने दिए अटैक के आदेश

अमेरिकी मीडिया संस्था सीबीएस न्यूज ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई दिन पहले ही इस हमले की अनुमति दे दी थी। खबर है कि अन्य सैन्य अभियानों की प्राथमिकता और खराब मौसम के कारण इस कार्रवाई को कुछ समय के लिए टाल दिया गया था। यह ट्रंप के वेनेजुएला विरोधी अभियान का अब तक का सबसे बड़ा और गंभीर सैन्य कदम माना जा रहा है।

वेनेजुएला पर अमेरिका का हमला (सोर्स- सोशल मीडिया)

हमले से ठीक पहले फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) ने वेनेजुएला के हवाई क्षेत्र में अमेरिकी वाणिज्यिक और निजी विमानों की उड़ानों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था, जो इस बात का संकेत था कि कुछ बड़ा होने वाला है। इस अभियान को ‘ऑपरेशन सदर्न स्पीयर’ का नाम दिया जा रहा है। ताजा हमले से पहले ही अमेरिका ने कैरेबियन सागर में अपनी नौसेना की तैनाती बढ़ा दी थी।

ड्रग कार्टेल के विरुद्ध अभियान: US

आधिकारिक तौर पर इसे ड्रग कार्टेल के खिलाफ अभियान बताया जा रहा है। खबरों के मुताबिक, अमेरिकी बलों ने वेनेजुएला के कुछ संदिग्ध ठिकानों और समुद्री जहाजों पर ड्रोन हमले भी किए हैं। अमेरिका का दावा है कि ये नार्को-टेररिस्ट यानी नशीले पदार्थों के तस्करों के अड्डे थे। इसके अलावा, अमेरिका ने वेनेजुएला से जुड़े तेल टैंकरों को भी जब्त करना शुरू कर दिया है। वाशिंगटन का तर्क है कि इन टैंकरों से होने वाली कमाई मादुरो सरकार को मजबूत कर रही है। मादुरो ने इसे अवैध युद्ध कहा है, जबकि वाशिंगटन इसे अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहा है।

ड्रग्स कॉर्टेल…या फिर तेल का खेल?

इस संघर्ष के पीछे की असली वजह को लेकर दुनिया दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है। अमेरिका का स्पष्ट पक्ष है कि उसका मकसद ड्रग्स और तानाशाही को खत्म करना है। अमेरिका का आरोप है कि निकोलस मादुरो सरकार ने वेनेजुएला को एक नार्को-स्टेट बना दिया है, जहां सरकार तस्करों द्वारा चलाई जा रही है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि मादुरो के अधिकारी ड्रग कार्टेल्स के साथ मिलकर अमेरिका में कोकीन और अन्य नशीले पदार्थ भेज रहे हैं।

यह भी पढ़ें: अमेरिकी हमलों के बाद वेनेजुएला की राजधानी में फैली आग, देशभर में इमरजेंसी का ऐलान, एयरस्पेस बंद

इसके अलावा 2024 के विवादित चुनावों के बाद से ही अमेरिका मादुरो को वैध राष्ट्रपति नहीं मानता। अमेरिका का कहना है कि वेनेजुएला की जनता त्रस्त है और वे वहां लोकतंत्र बहाल करना चाहते हैं। अमेरिकी नजरिए से देखें तो यह युद्ध तेल के लिए नहीं, बल्कि अपने नागरिकों को नशे से बचाने और एक तानाशाह को हटाने के लिए है। लेकिन इस कहानी का दूसरा पहलू बेहद चौंकाने वाला है। आलोचकों और भू-राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ड्रग्स तो बस एक बहाना है, असली खेल तेल का है।

वेनेजुएला के पास कितना तेल है?

वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार हैं, जो करीब 303 अरब बैरल हैं। यह मात्रा सऊदी अरब से भी ज्यादा है। हालांकि, संकट और प्रतिबंधों की वजह से वहां उत्पादन बहुत कम हो गया है, लेकिन आज की ऊर्जा-भूखी दुनिया में, जिसके पास वेनेजुएला का तेल है, उसके पास बहुत बड़ी ताकत है। एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू यह भी है कि वेनेजुएला का तेल बहुत गाढ़ा होता है, जिसे हेवी क्रूड कहते हैं। अमेरिकी रिफाइनरियों को इसी तरह के तेल की खास जरूरत होती है।

तेल टैंकरों को निशाना क्यों बनाया?

रूस और मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव के बीच अमेरिका अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। आलोचकों का तर्क है कि अगर मकसद सिर्फ ड्रग्स रोकना होता, तो अमेरिका तेल टैंकरों को क्यों निशाना बनाता? तेल टैंकरों को रोकने का सीधा मतलब है मादुरो की कमाई का आखिरी जरिया बंद करना और वहां की अर्थव्यवस्था को घुटनों पर लाना, ताकि वहां अमेरिका-समर्थित सरकार बन सके। हाल ही में मादुरो ने अमेरिका को तेल सौदों का प्रस्ताव देकर तनाव कम करने की कोशिश की थी, जो यह साबित करता है कि लड़ाई की जड़ में तेल ही है।

अमेरिकी कार्रवाई पर उठे सवाल

अमेरिका के भीतर भी इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हवाई से डेमोक्रेटिक सीनेटर ब्रायन शाट्ज ने कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि अमेरिका का वेनेजुएला में ऐसा कोई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हित नहीं है जो युद्ध को जायज ठहराए। उन्होंने कहा कि हमें अब तक यह सीख लेना चाहिए था कि किसी और मूर्खतापूर्ण सैन्य अभियान में बिना सोचे-समझे नहीं कूदना चाहिए।

अमेरिकी हमले के बाद वेनेजुएला का दृश्य (सोर्स- सोशल मीडिया)

शैट्ज ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी जनता को यह बताने की भी जहमत नहीं उठा रहे हैं कि वास्तव में हो क्या रहा है। वहीं, इस घटनाक्रम पर क्षेत्रीय प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। पड़ोसी देश कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वेनेजुएला पर हमला किया गया है। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने वेनेजुएला से सटी सीमाओं वाले शहरों में एक ऑपरेशनल प्लान सक्रिय कर दिया है। पेट्रो ने अमेरिकी राज्यों का संगठन और संयुक्त राष्ट्र से तत्काल बैठक बुलाने की भी मांग की है।

भारत के ऊपर भी भयानक संकट

भले ही यह लड़ाई अमेरिका और वेनेजुएला के बीच हो लेकिन इसकी आंच पूरी दुनिया महसूस करेगी। अगर वेनेजुएला का तेल बाजार से पूरी तरह गायब हो गया या वहां लंबा गृहयुद्ध छिड़ गया तो कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत तेल आयात करते हैं, उनके लिए यह बहुत बुरी खबर हो सकती है। इससे पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है और महंगाई बढ़ सकती है।

यह भी पढ़ें: धमाकों से दहली वेनेजुएला की राजधानी, अमेरिका ने बरसाए बम, देखें हमले का VIDEO

इसके अलावा अमेरिकी प्रतिबंधों और हमलों से वेनेजुएला की आम जनता पिस रही है। लाखों लोग अपना घर छोड़कर पड़ोसी देशों और अमेरिका की ओर भाग रहे हैं, जिससे लैटिन अमेरिका में एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो रहा है। एक और बड़ा खतरा रूस और चीन की एंट्री का है। वेनेजुएला के रूस और चीन के साथ गहरे संबंध हैं। अगर अमेरिका वहां सीधे तौर पर घुसता है तो रूस और चीन चुप नहीं बैठेंगे।

लोकल से ग्लोबल बनेगा ये युद्ध?

यह संघर्ष लोकल से ग्लोबल बन सकता है, जिससे दुनिया एक बार फिर दो गुटों में बंट सकती है। इतिहास गवाह है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नैतिकता अक्सर हितों का मुखौटा होती है। इसमें कोई शक नहीं कि वेनेजुएला में मादुरो का शासन निरंकुश है, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि अगर वेनेजुएला के पास तेल के बजाय सिर्फ केले या कॉफी होती तो शायद अमेरिका इतनी बड़ी नौसेना वहां नहीं भेजता। इसीलिए कहा जा रहा है कि जनवरी 2026 की शुरुआत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रही है।

💡

Frequently Asked Questions

  • Que: अमेरिका ने वेनेजुएला पर अटैक क्यों किया?

    Ans: आधिकारिक तौर पर यह ड्रग्स कार्टेल और तानाशाही के खिलाफ कार्रवाई है, लेकिन इसके पीछे वेनेजुएला के तेल भंडार को भी वजह बताया जा रहा है।

  • Que: वेनेजुएला के पास कितना बड़ा तेल भंडार है?

    Ans: वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार हैं, जो करीब 303 अरब बैरल हैं।

  • Que: अमेरिका ने वेनेजुएला में कहां-कहां अटैक किया?

    Ans: अमेरिका ने काराकस के अलावा मिरांडा, अरागुआ और ला गुएरा राज्यों में भी नागरिक और सैन्य ठिकानों पर बमबारी की है।

  • Que: अमेरिका-वेनेजुएला युद्ध का भारत पर क्या असर होगा?

    Ans: भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत तेल आयात करते हैं, वेनेजुएला के तेल भंडार बंद हुए तो अन्य देशों पर बोझ पड़ेगा, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। ऐसे में इसका असर भारत पर पड़ना तय है।

Us strikes venezuela caracas oil vs drug war trump maduro conflict impact on india explained

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Published On: Jan 03, 2026 | 04:21 PM

Topics:  

  • America
  • Donald Trump
  • Venezuela
  • World News

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