अमेरिका की 2026 की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति "Peace Through Strength" (सोर्स-सोशल मीडिया)
Power Through Peace: संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपनी वर्ष 2026 की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति जारी की है, जो वैश्विक सुरक्षा के प्रति वाशिंगटन के दृष्टिकोण में एक बड़े बदलाव का संकेत देती है। शक्ति के माध्यम से शांति नामक यह दस्तावेज स्पष्ट करता है कि अमेरिका अब अंतहीन युद्धों, सत्ता परिवर्तन और विदेशी धरती पर वैचारिक अभियानों की पुरानी नीतियों से दूरी बना रहा है। इसके बजाय, नई रणनीति लचीली और व्यावहारिक सोच पर आधारित है, जहां सैन्य शक्ति का उपयोग शांति स्थापित करने और अमेरिकी मातृभूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक उपकरण के रूप में किया जाएगा।
दस्तावेज के अनुसार, अमेरिका अपने विरोधियों के साथ एक सम्मानजनक और टिकाऊ शांति चाहता है, लेकिन यह शांति केवल इच्छा करने से नहीं बल्कि मजबूत सैन्य शक्ति के जरिए हासिल की जाएगी। रणनीति का मुख्य तर्क यह है कि जब विरोधी अमेरिका की सैन्य क्षमता और उसके दृढ़ निश्चय को स्पष्ट रूप से देखते हैं, तो वे अमेरिकी हितों को चुनौती देने से पहले रुक जाते हैं। इस प्रकार, सेना का प्राथमिक उद्देश्य युद्ध को रोकना और शांति बनाए रखना है।
US NDS 2026 का पहला पेज (सोर्स-सोशल मीडिया)
नई रणनीति में शीत युद्ध के बाद की उन नीतियों की कड़ी आलोचना की गई है जो अमेरिका के वास्तविक हितों से नहीं जुड़ी थीं। अमेरिका ने अब विदेशी देशों पर अपनी जीवन-शैली या व्यवस्था को जबरदस्ती थोपने के विचार को खारिज कर दिया है। अब सेना का पूरा ध्यान केवल उन्हीं जिम्मेदारियों पर केंद्रित रहेगा जो सीधे तौर पर अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा, स्वतंत्रता और समृद्धि से जुड़ी हों।
रणनीति यह स्पष्ट करती है कि प्रभावी कूटनीति के लिए सैन्य शक्ति का पीछे होना अनिवार्य है। अगर शांति के प्रयास विफल होते हैं या ठुकरा दिए जाते हैं, तो अमेरिकी सेना युद्ध लड़ने और उसे अमेरिकी हितों के अनुकूल तरीके से जीतने के लिए पूरी तरह तैयार रहेगी। सबसे मजबूत सैन्य स्थिति राष्ट्रपति को संकट के समय निर्णायक कार्रवाई करने की पूरी आजादी प्रदान करती है।
इस रणनीति के केंद्र में “अमेरिकी हित सबसे पहले” (US Interests First) का विचार है। अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों और साझेदारों को स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए खुद ज्यादा जिम्मेदारी लेनी होगी। यह मांग केवल अमेरिका की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि स्वयं उन देशों के अपने दीर्घकालिक हितों के लिए आवश्यक बताई गई है।
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दस्तावेज स्पष्ट करता है कि यह अलगाववाद (Isolationism) की नीति नहीं है। अमेरिका दुनिया से पूरी तरह अलग-थलग नहीं होगा, बल्कि विदेशों में अपना जुड़ाव सीमित और प्राथमिकता के आधार पर रखेगा। इसमें उपलब्ध संसाधनों का ईमानदारी से आकलन किया जाएगा और केवल उन्हीं खतरों पर ध्यान दिया जाएगा जिनका सीधा असर अमेरिका पर पड़ता हो।