जरूरत पर काम न आएं तो… ट्रंप के ‘युद्ध गुरु’ ने दिखाया दुनिया को सख्त तेवर, निशाने पर जर्मनी-स्पेन
US Iran War: अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने चेतावनी दी है कि जो देश ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देंगे, वहां से अमेरिका अपने बेस हटा लेगा।
- Written By: अमन उपाध्याय
सीनेटर लिंडसे ग्राहम, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
US Bases Under Threat Iran: ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने वैश्विक सहयोगियों को एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सलाहकार और ‘युद्ध गुरु’ माने जाने वाले सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने एक बड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अमेरिका उन देशों में अपने सैन्य ठिकाने नहीं रखेगा जो संकट के समय उसके काम नहीं आएंगे। यह बयान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
काम न आने वाले बेस का क्या फायदा?
सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने मौजूदा स्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि अगर अमेरिका जरूरत पड़ने पर अपने ही ठिकानों का इस्तेमाल नहीं कर सकता तो ऐसे देशों में बेस बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है। उनका यह बयान उन रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें कहा गया था कि स्पेन और जर्मनी जैसे कई यूरोपीय देशों ने ईरान के साथ जारी संघर्ष में अपने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से मना कर दिया है।
यूरोपीय देशों का डर और नाटो पर ट्रंप का हमला
यूरोप के कई देशों में अमेरिका के दर्जनों सैन्य बेस हैं जहां लगभग 80,000 सैनिक तैनात हैं। अकेले जर्मनी में ही अमेरिका का सबसे बड़ा बेस मौजूद है। हालांकि, ये देश इस समय ईरान के सीधे निशाने पर आने से डर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि वे अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र का उपयोग करने देते हैं, तो ईरान इसे उन पर हमले के बहाने के रूप में इस्तेमाल कर सकता है।
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इसी मुद्दे पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी नाटो देशों को खरी-खोटी सुनाई है। ट्रंप ने नाटो को एक ‘कागजी शेर’ करार देते हुए कहा कि ये देश ईरान को रोकने की लड़ाई में शामिल नहीं होना चाहते थे। ट्रंप ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने में मदद न करने के लिए सहयोगियों की आलोचना की और उन्हें ‘कायर’ तक कह डाला। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका इस व्यवहार को याद रखेगा।
अमेरिका का विशाल सैन्य नेटवर्क और चुनौतियां
वर्तमान में अमेरिका के पास दुनिया भर के 80 से अधिक देशों में 750 से अधिक सैन्य ठिकाने हैं। इनमें से 128 प्रमुख बेस 55 देशों में स्थित हैं। मध्य पूर्व में भी अमेरिका का एक बड़ा नेटवर्क है जिसमें कतर में सबसे बड़ा बेस और बहरीन में 5वें बेड़े का मुख्यालय शामिल है।
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जहां एक ओर अमेरिका अपने इस नेटवर्क का उपयोग ईरान को घेरने के लिए करना चाहता है वहीं ईरान इन मेजबान देशों को लगातार धमका रहा है। ग्राहम की यह चेतावनी स्पष्ट करती है कि आने वाले समय में अमेरिका अपनी विदेश नीति में बड़ा फेरबदल कर सकता है, जिसमें उन देशों से हाथ खींचना शामिल हो सकता है जो अमेरिकी सैन्य हितों के प्रति प्रतिबद्ध नहीं हैं।
