ईरान युद्ध ने भटकाया दुनिया का ध्यान, क्या यूक्रेन में और आक्रामक हो गया है रूस? जापोरिज्जिया में मचाई तबाही

Russia Ukraine War: यूक्रेन के जापोरिज्जिया में रूसी ड्रोन हमले में दो नागरिकों की मौत हो गई है। ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ध्यान भटकने के बीच रूस ने यूक्रेन पर हमले और तेज कर दिए हैं।
Iran War Diverts Global Attention: Has Russia Become Even More Aggressive in Ukraine? Devastation Unleashed in Zaporizhzhia.
रूस का यूक्रेन में ड्रोन अटैक, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Russia Ukraine War Zaporizhzhia Drone Attack: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा भीषण युद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां वैश्विक कूटनीति और युद्धक्षेत्र की हिंसा आपस में उलझ गई है। शनिवार सुबह यूक्रेन के रणनीतिक शहर जापोरिज्जिया पर रूस ने एक घातक ड्रोन हमला किया। इस हमले में एक निजी घर को निशाना बनाया गया जिसमें एक पुरुष और एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दो मासूम बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

हमले का विवरण और मानवीय क्षति

जापोरिज्जिया क्षेत्र के प्रमुख इवान फेडोरोव ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि रूसी ड्रोन ने रिहायशी इलाके को निशाना बनाया। गौरतलब है कि जापोरिज्जिया का लगभग आधा हिस्सा पहले से ही रूसी कब्जे में है जिसमें यूरोप का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र, जापोरिज्जिया परमाणु केंद्र भी शामिल है। यह ताजा हमला ऐसे समय में हुआ है जब यूक्रेन-अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण वार्ता की उम्मीद जताई जा रही थी।

ईरान संकट और रूस की नई रणनीति

विशेषज्ञों और यूक्रेनी अधिकारियों का मानना है कि रूस वर्तमान में मध्य पूर्व में जारी तनाव का लाभ उठा रहा है। 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से पूरी दुनिया का ध्यान यूक्रेन से हटकर ईरान-इजराइल संघर्ष की ओर चला गया है। इस कूटनीतिक 'भटकाव' का फायदा उठाते हुए रूसी सेना ने यूक्रेन के विभिन्न हिस्सों पर अपनी आक्रामकता बढ़ा दी है। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों का ध्यान हटने के कारण त्रिपक्षीय शांति वार्ता ठप पड़ी हुई है।

शांति वार्ता और जेलेंस्की की अपील

यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिकी मध्यस्थता वाली वार्ता को फिर से शुरू करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। उन्होंने हाल ही में एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल को अमेरिका भेजा है ताकि मियामी में होने वाली अपेक्षित वार्ता को आगे बढ़ाया जा सके। जेलेंस्की का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाशिंगटन न केवल वार्ता फिर से शुरू कराए, बल्कि अन्य नाटो देशों को भी यूक्रेन को अमेरिकी हथियार भेजने की अनुमति देता रहे।

आर्थिक मोर्चे पर यूक्रेन की चुनौती

युद्धक्षेत्र के साथ-साथ यूक्रेन आर्थिक मोर्चे पर भी बड़ी लड़ाई लड़ रहा है। वर्तमान में रूसी बलों का यूक्रेन के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा है। जहां एक ओर रूस को तेल प्रतिबंधों पर अमेरिका से मिली अस्थाई छूट के कारण वित्तीय लाभ हो रहा है, वहीं यूक्रेन नकदी की भारी कमी का सामना कर रहा है।

यूक्रेन अभी भी यूरोपीय संघ (EU) द्वारा वादा किए गए 90 बिलियन यूरो (लगभग 103 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के ऋण का इंतजार कर रहा है जिसे मिलने में हो रही देरी ने कीव की चिंताएं बढ़ा दी हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने संकेत दिया है कि रूस और यूक्रेन के बीच वार्ता का नया दौर जल्द हो सकता है, लेकिन पश्चिमी देशों का आरोप है कि पुतिन जानबूझकर देरी कर रहे हैं ताकि वे युद्धक्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकें।

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