ईरान के नतांज न्यूक्लियर प्लांट पर अमेरिका-इजरायल का भीषण हमला, क्या अब शुरू होगी ‘परमाणु जंग’?
US Israel Iran War: अमेरिका और इजरायल ने शनिवार सुबह ईरान के नतांज़ परमाणु केंद्र को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, हमले के बाद किसी भी तरह के रेडियोधर्मी रिसाव की सूचना नहीं है।
- Written By: अमन उपाध्याय
ईरान का न्यूक्लियर प्लांट, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
US Israel Attack Iran Natanz Nuclear Facility: मध्य पूर्व में जारी तनाव शनिवार सुबह एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया, जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नतांज़ यूरेनियम संवर्धन केंद्र पर हवाई हमले किए। ईरान की समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले के बाद अब तक किसी भी तरह के रेडियोधर्मी रिसाव की खबर नहीं मिली है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि परमाणु केंद्र के आसपास रहने वाले निवासी सुरक्षित हैं और उन्हें फिलहाल कोई खतरा नहीं है।
युद्ध का 22वां दिन और वैश्विक संकट
28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए शुरुआती हमलों के साथ शुरू हुआ यह संघर्ष अब अपने 22वें दिन में प्रवेश कर चुका है। नतांज़ पर हुआ यह ताजा प्रहार इस क्षेत्र में जारी उस भीषण युद्ध का हिस्सा है जिसने पूरे खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित कर दिया है।
इस सप्ताह तनाव में और भी तीखा उछाल तब देखा गया जब इजरायल ने ईरान के प्रमुख गैस क्षेत्र ‘साउथ पार्स’ को निशाना बनाया। इसके जवाब में ईरान ने कतर स्थित दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी प्लांट ‘रास लफान’ पर जवाबी हमला कर दिया जो उसी गैस क्षेत्र के दूसरी तरफ स्थित है। इन उच्च-प्रभाव वाली कार्यवाहियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
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नतांज का रणनीतिक महत्व
नतांज परमाणु केंद्र ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुख्य केंद्र माना जाता है। यह पहाड़ों के काफी गहराई में स्थित है जो इसे हवाई हमलों से सुरक्षा प्रदान करता है। यहां हजारों सेंट्रीफ्यूज मौजूद हैं जो नागरिक ऊर्जा और संभावित रूप से हथियारों के ग्रेड के यूरेनियम का संवर्धन करते हैं। इसकी भूमिगत बनावट और ‘पिकएक्स माउंटेन’ टनल कॉम्प्लेक्स की जटिलता के कारण ही यह हमलों के बावजूद अपना काम जारी रखने में सक्षम रहा है।
ट्रंप प्रशासन की रणनीति और पिछला इतिहास
पिछले साल जून में भी अमेरिका ने नतांज, फोर्डो और इस्फहान स्थित केंद्रों पर हमला किया था। उस समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि इन हमलों ने ईरानी परमाणु सुविधाओं को ‘पूरी तरह से नष्ट’ कर दिया है। उन्होंने इसे एक ‘शानदार सैन्य सफलता’ करार दिया था। हालांकि, ताजा हमलों से यह स्पष्ट है कि ईरान ने इन सुविधाओं को फिर से बहाल कर लिया था। वर्तमान प्रशासन लंबे समय से ईरान के बम-ग्रेड यूरेनियम को ट्रैक करने और उसे वहां से हटाने के लिए ‘प्रोजेक्ट हनी बैजर’ जैसी योजनाओं पर काम कर रहा है।
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निरीक्षण का अभाव और परमाणु सुरक्षा
जून के संघर्ष से पहले, ईरान का परमाणु कार्यक्रम दुनिया के सबसे अधिक निरीक्षण वाले कार्यक्रमों में से एक था जहां आईएईए (IAEA) के अधिकारी नियमित दौरा करते थे। लेकिन हमलों के बाद यह पहुंच समाप्त हो गई है जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में परमाणु सुरक्षा को लेकर गहरी चिंताएँ पैदा हो गई हैं। तेहरान सरकार ने संकेत दिया है कि वह अपनी परमाणु सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए ‘विशेष उपाय’ करने के लिए तैयार है।
