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अमेरिका-ईरान में होगा महायुद्ध! डर के साए में अरब मुल्क, डोनाल्ड ट्रंप बोले- जंग नहीं चाहता लेकिन…

US-Iran War: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान को संयम बरतने की अपील की जा रही है, क्योंकि किसी भी सैन्य कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैल सकती है।

  • Written By: अक्षय साहू
Updated On: Jan 31, 2026 | 08:03 AM

अमेरिका-ईरान के बीच संभावित युद्ध से अरब देश परेशान (सोर्स- सोशल मीडिया)

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US-Iran Conflict: मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ने की आशंका है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा ईरान पर संभावित सैन्य हमले की चेतावनी दिए जाने और क्षेत्र में अमेरिकी सेना की मौजूदगी बढ़ाने के बाद, कई अरब और मुस्लिम देश चिंतित हो गए हैं। ये देश अमेरिका और ईरान, दोनों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं।

नाम न बताने की शर्त पर एक अरब राजनयिकने बताया कि सऊदी अरब, तुर्की, ओमान और कतर जैसे देश इस समय अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन और ईरान की राजधानी तेहरान दोनों के संपर्क में हैं। इन देशों का मानना है कि अगर अमेरिका या ईरान में से किसी ने भी स्थिति को और बिगाड़ा, तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व पर पड़ेगा। इससे न केवल राजनीतिक अस्थिरता बढ़ेगी, बल्कि तेल और गैस जैसे ऊर्जा बाजार भी बुरी तरह प्रभावित होंगे, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

अमेरिका-ईरान युद्ध से क्यों डरे हैं अरब मुल्क

इन देशों को सबसे ज्यादा डर इस बात का है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो ईरान जवाबी कार्रवाई कर सकता है। यह जवाब सीधे तौर पर उन अरब देशों पर या उनके यहां मौजूद अमेरिकी ठिकानों और हितों पर हो सकता है। इससे ये देश बिना सीधे शामिल हुए भी युद्ध की चपेट में आ सकते हैं।

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वाशिंगटन पहुंचे सऊदी रक्षा मंत्री

इसी बीच सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने वाशिंगटन में अमेरिका के कई बड़े नेताओं से मुलाकात की। इनमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, ट्रंप के क्षेत्रीय दूत स्टीव विटकॉफ और अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी जनरल डैन केन शामिल थे। इन बैठकों में क्षेत्रीय और वैश्विक शांति बनाए रखने पर चर्चा हुई।

ये घटनाएं ऐसे समय में हो रही हैं जब ट्रंप ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर अपने कारण बदल दिए हैं। पहले उन्होंने कहा था कि ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने और प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार के कारण कार्रवाई जरूरी है। लेकिन अब वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने की बात कर रहे हैं। हालांकि, ट्रंप यह भी दावा कर चुके हैं कि जून में हुए अमेरिकी हमलों में ईरान के परमाणु ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था।

ईरान से युद्ध को लेकर ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप का कहना है कि वे युद्ध नहीं चाहते और ईरान के साथ समझौता करना चाहते हैं। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच कोई समझौता हो जाएगा, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो आगे क्या होगा, यह कहना मुश्किल है। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने ईरान को कोई समय सीमा दी है, तो उन्होंने साफ जवाब नहीं दिया और कहा कि यह बात सिर्फ वही लोग जानते हैं जो इसमें सीधे शामिल हैं।

ट्रंप प्रशासन के दो अधिकारियों ने बताया कि परमाणु मुद्दे पर ट्रंप का फिर से जोर देना रणनीति बदलने का संकेत नहीं है, बल्कि यह ईरान से निपटने के उनके व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है। शुरुआत में ट्रंप ने ईरान के अंदर हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर ध्यान केंद्रित किया ताकि वहां की जनता को हौसला मिले और सरकार पर दबाव बने।

ट्रंप ने यह भी कहा कि उनकी चेतावनी के बाद ईरान ने प्रदर्शनकारियों को फांसी देने से परहेज किया, हालांकि उन्होंने माना कि अब भी कई लोग मारे जा रहे हैं। उनके अनुसार, ईरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका, पूरे मध्य पूर्व और खासकर इज़राइल के लिए एक बड़ा खतरा है, और इस खतरे को खत्म करना जरूरी है।

किसी भी धमकी के बीच नहीं होगी वार्ता

वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अभी अमेरिका के साथ किसी ठोस बातचीत की योजना नहीं बनी है। उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान शांति के साथ-साथ युद्ध के लिए भी तैयार है।

यह भी पढ़ें: इजरायल को हथियारों का जखीरा देगा अमेरिका…ट्रंप ने 6 अरब से ज्यादा की डील को दी मंजूरी, टेंशन में ईरान

वहीं, तुर्की इस तनाव को कम करने की कोशिश कर रहा है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ बनने की पेशकश की है। उनका मानना है कि बातचीत के जरिए इस संकट को टाला जा सकता है।

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Frequently Asked Questions

  • Que: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव क्यों बढ़ रहा है?

    Ans: मध्य पूर्व में तनाव इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खतरा मानता है, जबकि ईरान अमेरिकी दबाव और प्रतिबंधों का विरोध करता है। संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनियों ने हालात और गंभीर बना दिए हैं।

  • Que: अरब और मुस्लिम देश इस स्थिति को लेकर चिंतित क्यों हैं?

    Ans: इन देशों को डर है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध हुआ, तो उसका सीधा असर उनके देशों पर पड़ेगा। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और तेल-गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

  • Que: ट्रंप प्रशासन ईरान से क्या चाहता है?

    Ans: ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाए और बातचीत के जरिए एक नया समझौता करे। साथ ही अमेरिका ईरान को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।

  • Que: ईरान का इस पूरे मुद्दे पर क्या रुख है?

    Ans: ईरान का कहना है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन दबाव में नहीं आएगा। उसने साफ किया है कि वह शांति चाहता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर युद्ध के लिए भी तैयार है।

  • Que: तुर्की और अन्य देश क्या भूमिका निभा रहे हैं?

    Ans: तुर्की, सऊदी अरब, ओमान और कतर जैसे देश अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहे हैं। उनका उद्देश्य तनाव कम करना और क्षेत्र को बड़े संघर्ष से बचाना है।

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Published On: Jan 31, 2026 | 08:03 AM

Topics:  

  • Donald Trump
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  • World News

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