Nepal-China Dispute: मनमोहन टेक्निकल कॉलेज में जलाई गई शी जिनपिंग की किताबें, चीन ने जताई आपत्ति
Xi Jinping Book: नेपाल के मोरंग जिले में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की किताब 'द गवर्नेंस ऑफ चाइना' जलाने से तनाव बढ़ गया है। चीन ने कड़ी आपत्ति जताई है, जबकि कॉलेज ने इसे सफाई की प्रक्रिया बताया।
- Written By: प्रिया सिंह
नेपाल में शी जिनपिंग की किताब जलाने से दोनों देशों के बीच बढ़ा तनाव (सोर्स-सोशल मीडिया)
Protest Chinese Influence Nepal: नेपाल और चीन के बीच वर्षों पुराने घनिष्ठ संबंधों में एक नई कड़वाहट पैदा हो गई है। मोरंग जिले के एक तकनीकी कॉलेज में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सैकड़ों किताबें जलाने की घटना ने कूटनीतिक हलचल मचा दी है। नेपाल में चीनी प्रभाव के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन की खबरों के बीच चीन ने इस पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया और गहरी चिंता व्यक्त की है। नेपाल सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
घटना का विवरण
यह विवादित घटना नेपाल के मोरंग जिले के बुढ़ीगंगा में स्थित मनमोहन टेक्निकल कॉलेज में शनिवार की रात को घटित हुई थी। वहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रसिद्ध और वैश्विक रूप से चर्चित किताब “The Governance of China” की सैकड़ों प्रतियां जलाई गईं। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो गया जिसमें किताबों को आग के हवाले करते हुए साफ देखा जा सकता है। इस वीडियो के सामने आने के बाद काठमांडू में चीनी दूतावास ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया और नेपाल सरकार से शिकायत की।
Controversy has emerged after thousands of books related to the Chinese president Xi Jinping were burned at Manmohan Technical University in Nepal.
Students questioned how such a large number of books reached the college and why they were destroyed. pic.twitter.com/sBg92LdvoV — 🔻☭★ (@Communist977) March 16, 2026
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चीन की तीखी प्रतिक्रिया
वीडियो के फैलते ही काठमांडू स्थित चीनी दूतावास ने नेपाल के विदेश मंत्रालय को एक औपचारिक ‘नोट वर्बेल’ भेजकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। चीन ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठाई है। चीनी अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की संवेदनशील घटनाएं दोनों पड़ोसी देशों के बीच वर्षों से चले आ रहे घनिष्ठ संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं। चीन ने नेपाल सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सरकार की सक्रियता
चीनी दूतावास की ओर से दबाव बढ़ने के बाद नेपाल का विदेश मंत्रालय तुरंत हरकत में आया और मामले को गृह मंत्रालय के पास भेज दिया। गृह मंत्रालय ने स्थानीय प्रशासन और नेपाल पुलिस को इस घटना की गहन जांच करने और दोषियों को पकड़ने का कड़ा निर्देश दिया। पुलिस ने कॉलेज परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी है और कॉलेज प्रशासन से इस पूरे मामले पर लिखित स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या यह घटना किसी सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी या महज लापरवाही।
कॉलेज का बचाव
विवाद गहराने पर कॉलेज प्रशासन और स्थानीय नेताओं ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि किताबों को जलाना कोई जानबूझकर किया गया कृत्य नहीं था। उनके अनुसार लाइब्रेरी में जगह बनाने के लिए पुरानी और क्षतिग्रस्त किताबों और कचरे की सफाई की जा रही थी। कॉलेज ने इस पूरी घटना को एक “रूटीन क्लीनिंग” की प्रक्रिया बताया है और कहा है कि अनजाने में कुछ किताबें आग की चपेट में आ गईं। हालांकि, वायरल वीडियो में किताबों को जिस तरह से जलाया गया है, वह कॉलेज के दावों पर सवाल उठाता है।
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कूटनीतिक परिणाम
यह घटना नेपाल-चीन संबंधों की नाजुकता को उजागर करती है, विशेष रूप से तब जब दोनों देश बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव जैसी बड़ी परियोजनाओं पर सहयोग कर रहे हैं। इस विवाद ने नेपाल में बढ़ रही चीन-विरोधी भावनाओं की ओर भी अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। प्रशासन ने कथित तौर पर मीडिया संस्थानों से उस वीडियो को हटाने के लिए भी कहा है ताकि तनाव को और अधिक बढ़ने से रोका जा सके। फिलहाल, यह मामला नेपाल की आंतरिक राजनीति और चीन के साथ उसके कूटनीतिक रिश्तों के बीच एक बड़ी चुनौती बन गया है।
