डोनाल्ड ट्रंप और मोजतबा खामेनेई, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
US Iran Talks Ceasefire Upadate: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले छह हफ्तों से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयास एक बार फिर तेज हो गए हैं,। हालांकि रविवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई 21 घंटों की लंबी आमने-सामने की बातचीत बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई, लेकिन दोनों पक्ष एक नए दौर की वार्ता के लिए मंच तैयार कर रहे हैं। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य 21 अप्रैल को समाप्त होने वाले दो सप्ताह के अस्थाई युद्धविराम से पहले किसी ठोस समाधान पर पहुंचना है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, नई वार्ता इसी सप्ताह गुरुवार को आयोजित की जा सकती है। वर्तमान में इस उच्च स्तरीय बैठक के लिए दो प्रमुख स्थानों, इस्लामाबाद और जिनेवा पर विचार किया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्वयं इन-पर्सन (व्यक्तिगत) वार्ताओं के लिए तैयार हैं बशर्ते तेहरान उनकी मांगों को मानने के लिए सहमत हो जाए। ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए थे कि “दूसरी तरफ” से उन्हें फोन आया है और वे समझौता करना चाहते हैं।
इस्लामाबाद में पिछले दौर की वार्ता का नेतृत्व अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया था, जिसमें विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी शामिल थे। ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ कर रहे थे। जेडी वेंस ने फॉक्स न्यूज को बताया कि हालांकि कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ लेकिन बातचीत में काफी प्रगति हुई है।
उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिकी पक्ष की मांगों की दिशा में आगे बढ़ा है, लेकिन अभी भी वह पर्याप्त नहीं है। वेंस के अनुसार, अब अगली चाल ईरान को चलनी है ताकि चर्चा को आगे बढ़ाया जा सके।
इस बातचीत की मेज पर कई पेचीदा और गंभीर मुद्दे मौजूद हैं। इनमें सबसे प्रमुख होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का संकट है, जिसे ईरान ने प्रभावी ढंग से अवरुद्ध कर दिया है, जबकि अमेरिका ने इसे फिर से खोलने का संकल्प लिया है। इसके अलावा, ईरान का परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध भी चर्चा के केंद्र में हैं।
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एक ओर जहां राजनयिक मेज पर समाधान तलाश रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लेबनान में इजरायल द्वारा ईरान समर्थित हिजबुल्लाह पर किए जा रहे हमले इस नाजुक युद्धविराम के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। पाकिस्तानी सरकारी सूत्रों का कहना है कि वार्ता के बीच में एक समय ऐसा लगा था कि कोई बड़ी सफलता (Breakthrough) मिल जाएगी लेकिन अचानक परिस्थितियां बदल गईं। अब पूरी दुनिया की नजरें गुरुवार को होने वाली संभावित बैठक पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि पश्चिम एशिया शांति की ओर बढ़ेगा या महायुद्ध की ओर।