ट्रंप की युद्ध नीति को बड़ा झटका! सऊदी-UAE ने दिखाया ठेंगा, अब ये मुस्लिम देश बनेगा ट्रंप का ‘लॉन्चपैड’?
US Iran War Strategy: ईरान पर हमले के लिए अमेरिका को सऊदी और UAE जैसे खाड़ी देशों से समर्थन नहीं मिला है। अब जॉर्डन अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार और सैन्य ठिकाने के रूप में उभर रहा है।
- Written By: अमन उपाध्याय
अमेरिका ईरान में बढ़ता तनाव, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Middle East Conflict News In Hindi: मिडल ईस्ट रूद के ढेर पर खड़ा नजर आ रहा है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को सत्ता से बेदखल करने की अपनी रणनीति तेज कर दी है, लेकिन इस बार अमेरिका को अपने पुराने सहयोगियों से वह समर्थन नहीं मिल रहा जिसकी उसे उम्मीद थी।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान पर संभावित हमले के लिए खाड़ी देशों से उनके एयरस्पेस और लॉन्चपैड के इस्तेमाल की अनुमति मांगी थी, लेकिन सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर ने इसे साफ तौर पर खारिज कर दिया है।
सऊदी-UAE के तरफ से ट्रंप को झटका
खाड़ी के इन प्रभावशाली मुस्लिम देशों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ईरान पर किसी भी सैन्य हमले के लिए अपनी जमीन या आसमान का इस्तेमाल नहीं होने देंगे। यह फैसला अमेरिका के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है। गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में ही इन देशों ने अमेरिका को संदेश दे दिया था कि वे रिफ्यूलिंग या रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए भी अपना एयरस्पेस नहीं देंगे।
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हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने मई 2025 में इन देशों का दौरा कर उन्हें मनाने की कोशिश की और कई हथियार सौदे भी किए, जिनमें कतर को MQ-9 रीपर ड्रोन और सऊदी अरब को सटीक रॉकेट सिस्टम देना शामिल था, लेकिन इसके बावजूद ये देश ईरान के खिलाफ सीधे युद्ध में शामिल होने को तैयार नहीं हैं।
अमेरिका का नया रणनीतिक ठिकाना
खाड़ी देशों की बेरुखी के बीच ‘जॉर्डन’ अमेरिका के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। जॉर्डन ने अभी तक सार्वजनिक रूप से अमेरिका को अपना एयरस्पेस देने से इनकार नहीं किया है। वर्तमान में जॉर्डन के ‘मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस’ पर अमेरिका के करीब 4,000 सैनिक तैनात हैं।
हालिया दिनों में यहां अमेरिकी F-15 फाइटर जेट्स की गतिविधियों में भारी तेजी देखी गई है। इसके अलावा, अमेरिका ने यहां पैट्रियट और THAAD जैसे एडवांस डिफेंस सिस्टम भी तैनात कर दिए हैं, जो इस बात का संकेत है कि अगर युद्ध छिड़ता है, तो जॉर्डन अमेरिका का मुख्य बैक-सपोर्ट बनेगा।
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ईरान के आंतरिक हालात
अमेरिका और इजरायल इस समय ईरान में चल रहे भारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों को एक बड़े मौके के रूप में देख रहे हैं। इन प्रदर्शनों में खामेनेई को हटाने की मांग तेज हो रही है, जिसे दबाने के लिए ईरानी शासन बल प्रयोग कर रहा है। ट्रंप प्रशासन का असली टारगेट केवल बमबारी करना नहीं, बल्कि ईरान में तख्तापलट करना है।
इससे पहले 22 जून 2025 को अमेरिका ने डियागो गार्शिया बेस का उपयोग कर ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर हमला किया था, जिसके बाद से दोनों देश युद्ध के मुहाने पर हैं। अब जॉर्डन के साथ मिलकर अमेरिका इस जंग को निर्णायक मोड़ पर ले जाने की तैयारी में है।
