ईरान-अमेरिका सीजफायर पर मंडराया खतरा! ट्रंप प्रशासन की दोटूक चेतावनी- ‘नाजुक’ है समझौता, तेहरान न समझे कमजोरी
US Iran Ceasefire: अमेरिका ने ईरान के साथ हुए हालिया युद्धविराम को 'नाजुक' करार दिया है। वाशिंगटन का कहना है कि सैन्य लक्ष्य पूरे हो चुके हैं और अब शांति का भविष्य पूरी तरह ईरान के रुख पर निर्भर है।
- Written By: अमन उपाध्याय
जेडी वेंस, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
US Iran Ceasefire Fragile News: वाशिंगटन और तेहरान के बीच 14 दिनों के युद्धविराम की घोषणा के बाद भी अनिश्चितता के बादल छंटते नजर नहीं आ रहे हैं। वाशिंगटन में आयोजित एक हालिया कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी प्रशासन ने इस संघर्ष विराम को ‘बेहद नाजुक’ करार दिया है।
अधिकारियों का मानना है कि यह समझौता फिलहाल केवल अपने शुरुआती चरण में है और इसकी स्थिरता को लेकर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया इस सीजफायर को स्थायी शांति की दिशा में एक कदम मान रही थी।
अमेरिका का अल्टीमेटम
अमेरिकी रिपोर्टों के अनुसार, यह संघर्ष विराम अभी केवल 8 से 12 घंटे पुराना है जिसके कारण इसे अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। यह समझौता अमेरिका द्वारा ईरान को दिए गए उस कड़े अल्टीमेटम के बाद संभव हुआ है जिसमें प्रमुख समुद्री मार्गों को खोलने और वैश्विक व्यापार को बाधित करने वाली गतिविधियों को रोकने की शर्त रखी गई थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्पष्ट निर्देश थे कि यदि ईरान रणनीतिक जलडमरूमध्यों (Straits) को फिर से खोलने पर सहमत होता है, तभी अमेरिका अपने सैन्य हमलों को रोकेगा।
सम्बंधित ख़बरें
ईरान ने मानी Trump की बात? दुनिया से छिपी इस डील में क्या-क्या? VIDEO
Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन के सीजफायर पर बनी सहमति, होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा
फिलीपींस में कुदरत का कहर: आंधी से ढही 9 मंजिला इमारत, मलबे में दबे दर्जनों मजदूरों को बचाने की जंग जारी!
Kyiv Air Strike: रूस की कीव में एयर स्ट्राइक, रिहायशी इलाकों पर हमले में 1 की मौत, कनाडा ने की निंदा
सैन्य उद्देश्यों की प्राप्ति का दावा
अमेरिका का रुख इस मामले में काफी सख्त और स्पष्ट है। प्रशासन का दावा है कि संघर्ष विराम लागू होने से पहले ही अमेरिका अपने प्राथमिक सैन्य उद्देश्यों को हासिल कर चुका है। राष्ट्रपति ट्रंप का मुख्य लक्ष्य ईरानी सैन्य क्षमता को इस हद तक कमजोर करना था कि वह भविष्य में किसी बड़े खतरे को अंजाम न दे सके और अधिकारियों के मुताबिक वह उद्देश्य अब पूरा हो चुका है। यही कारण है कि अमेरिका अब कूटनीति की मेज पर मजबूत स्थिति में बैठा है।
ईरानी नेतृत्व में गहराता मतभेद
समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधा ईरान के भीतर नेतृत्व का विरोधाभास बताया जा रहा है। अमेरिकी सूत्रों के अनुसार, ईरान के शीर्ष नेतृत्व में इस समझौते को लेकर एक राय नहीं है। जहां कुछ नेता इस शांति प्रक्रिया के प्रति सकारात्मक रुख अपना रहे हैं वहीं कुछ अन्य नेता समझौते के स्वरूप और इसके परिणामों को लेकर ‘भ्रामक बातें’ फैला रहे हैं। यह आंतरिक खींचतान इस संघर्ष विराम को अस्थिर बना रही है और यदि इसे समय रहते नहीं संभाला गया तो यह समझौता कभी भी टूट सकता है।
‘धैर्य की भी एक सीमा है’
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी टीम को ईमानदारी से बातचीत करने का निर्देश तो दिया है लेकिन साथ ही ईरान को चेतावनी भी दी है कि अमेरिकी धैर्य सीमित है। यदि ईरान वार्ता के दौरान सकारात्मक रुख नहीं अपनाता है तो अमेरिका के पास ‘सैन्य, कूटनीतिक और असाधारण आर्थिक दबाव’ जैसे मजबूत विकल्प पूरी तरह से तैयार हैं।
यह भी पढ़ें:- अमेरिका की मात्र 10% ताकत के आगे ढेर हुआ ईरान! पेंटागन का ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में बड़ी जीत का दावा
फिलहाल, यह ईरान-अमेरिका युद्धविराम एक सीमित कूटनीतिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी सफलता अब पूरी तरह से इस बात पर टिकी है कि ईरान आने वाली वार्ताओं में किस तरह का व्यवहार करता है।
