मलक्का जलडमरूमध्य, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
US India Joint Strategy Malacca Strait: जब पूरी दुनिया का ध्यान ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य के तनाव पर केंद्रित है, तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘एशिया के होर्मुज’ यानी मलक्का जलडमरूमध्य (Malacca Strait) में चीन को घेरने के लिए एक बड़ी बिसात बिछा दी है। अमेरिका अब इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की घेराबंदी करने के लिए सक्रिय हो गया है जहां भारत पहले से ही अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण ‘किंग’ की भूमिका में है।
अमेरिका की इस नई रणनीति में भारत सबसे अहम साझेदार बनकर उभरा है। भारत अपने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के जरिए इस क्षेत्र में पहले से ही एक अभेद्य दीवार के रूप में खड़ा है। मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर स्थित भारत का कैंपबेल बे एयरबेस हर उस जहाज की निगरानी करता है जो चीन की ओर जाता है। भारत के पास इतनी सैन्य क्षमता है कि वह जब चाहे इस व्यापारिक मार्ग के ‘एंट्री गेट’ को पूरी तरह बंद कर सकता है।
अमेरिका ने हाल ही में इंडोनेशिया के साथ एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता किया है, जिसके तहत अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशिया के हवाई क्षेत्र (Airspace) में सीधी पहुंच मिल गई है। इस डील का मुख्य उद्देश्य मलक्का के संकरे रास्ते पर आसमान से पैनी नजर रखना है। राष्ट्रपति ट्रंप का लक्ष्य इस मार्ग को नियंत्रित कर चीन की आर्थिक ‘ऑक्सीजन’ यानी तेल और व्यापारिक आपूर्ति पर लगाम कसना है, ठीक उसी तरह जैसे ईरान होर्मुज के जरिए दुनिया पर दबाव बनाता है।
चीन की हर हरकत पर ‘डिजिटल नजर’ रखने के लिए भारत सरकार अंडमान और निकोबार को एक वैश्विक ट्रेडिंग हब और सैन्य किले के रूप में विकसित कर रही है। इस ‘ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना’ पर करीब 72,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
इसके तहत गैलाथिया खाड़ी में एक विशाल इंटरनेशनल ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल बनाया जा रहा है जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री जहाजों को अपनी ओर आकर्षित करेगा। साथ ही, यहां रनवे का विस्तार और आधुनिक रडार स्टेशन लगाकर मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी अपग्रेड किया जा रहा है।
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चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 80% तक मलक्का मार्ग पर निर्भर है, और अब उस पर दोहरा दबाव बन गया है। जहां इंडोनेशिया के जरिए अमेरिका आसमान से निगरानी करेगा वहीं समंदर में भारत का ‘ट्राइकैंड’ (Tri-Service Command) तैनात है। यदि चीन कोई भी उकसावे वाली कार्रवाई करता है तो भारत और अमेरिका मिलकर उसकी सप्लाई लाइन काट सकते हैं जिससे चीन की अर्थव्यवस्था धड़ाम हो सकती है।