ईरानी हमले में अमेरिका का E3 AWACS एयरक्राफ्ट तबाह (सोर्स- सोशल मीडिया)
US E-3 Aircraft Destroyed: सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले में अमेरिकी E-3 सेंट्री AWACS को नुकसान पहुंचा। यह एयरबोर्न वॉर्निंग और कंट्रोल एयरक्राफ्ट है, जो युद्धक्षेत्र में ड्रोन, मिसाइल, विमान और एरियल रिफ्यूलिंग टैंकरों की निगरानी और समन्वय में अहम भूमिका निभाता है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया कि इस हमले में कम से कम 12 अमेरिकी घायल हुए, जिनमें दो की हालत गंभीर है।
E-3 सेंट्री AWACS कोई आम विमान नहीं है, यह एक ट्रिक्ड-आउट बोइंग 707 है जो एयरबोर्न कमांड सेंटर की तरह कार्य करता है। यह 250 मील तक के इलाके में टारगेट, लड़ाकू विमान, ड्रोन और मिसाइल गतिविधियों पर नजर रख सकता है। रिटायर्ड US एयर फोर्स कर्नल जॉन वेनेबल ने कहा कि इस नुकसान से अमेरिका की खाड़ी क्षेत्र में निगरानी और स्थिति का आकलन करने की क्षमता पर असर पड़ेगा।
प्रिंस सुल्तान एयर बेस मध्य पूर्व में अमेरिकी एयर ऑपरेशन्स के लिए एक अहम हब है। यह इंटेलिजेंस इकट्ठा करने, एरियल रिफ्यूलिंग और स्ट्राइक समन्वय में मदद करता है। AWACS जैसे विमान एयरबोर्न कमांड और सर्विलांस में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं, जबकि टैंकर प्लेन लड़ाकू विमानों की ऑपरेशनल पहुंच बढ़ाने में मदद करते हैं।
🔥 At least 2 American E-3 aircrafts destroyed at Prince Sultan Air Base Saudi Arabia, and there are only 16 of these aircraft in the United States. pic.twitter.com/7cnj8FY2iG — True Promise – الوعد الصادق ✪🇮🇷 (@IRTruePromise) March 29, 2026
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि ईरान पर अमेरिकी और इजराइली बमबारी शुरू होने के बाद से 303 अमेरिकी घायल हो चुके हैं। CENTCOM के प्रवक्ता नेवी कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बताया कि अधिकांश चोटें मामूली हैं और 273 सैनिक ड्यूटी पर लौट आए हैं।
इस बीच, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। 3,500 मरीन और नाविक USS Tripoli (LHA-7) पर तैनात होकर इलाके में पहुंचे हैं। CENTCOM ने इसकी पुष्टि की और कहा कि सेना 27 मार्च को USS त्रिपोली पर पहुंच गई।
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यह नई तैनाती ऐसे समय में हुई है जब पेंटागन कथित तौर पर मिडिल ईस्ट में 10,000 अतिरिक्त जमीनी सैनिक भेजने पर विचार कर रहा है। इसका उद्देश्य राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को डिप्लोमेसी के अलावा और अधिक सैन्य विकल्प उपलब्ध कराना है।