इजरायली एयरबेस पर उतरे एफ-22 फाइटर जेट (सोर्स- सोशल मीडिया)
PM Modi Israel Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे से पहले ही अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी हैं, जिससे ईरान पर संभावित हमला की आशंका और तेज हो गई है। इजरायल के तेल अवीव में प्रधानमंत्री मोदी के आगमन से पहले ही अमेरिका ने पहली बार F‑22 रैप्टर फाइटर जेट को तैनात कर दिया है, जो इस क्षेत्र में युद्ध‑सज्जित माहौल को और भी संवेदनशील बना रहा है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ने पीएम मोदी के दौरे के पूरा होने तक ईरान पर हमला रोक रखा है और अब प्रधानमंत्री मोदी के भारत वापसी के बाद किसी भी समय यह कार्रवाई हो सकती है।
इसी कड़ी में यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड विमानवाहक युद्धपोत भी इजरायल के बेहद करीब पहुंच चुका है। यह दुनिया का सबसे बड़ा और अत्यंत शक्तिशाली न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर माना जाता है, और उसकी तैनाती से अमेरिका की युद्ध‑तैयारियों का पैमाना स्पष्ट होता है। अफरातफरी के बीच प्रधानमंत्री मोदी दो दिवसीय औपचारिक यात्रा पर इजरायल में हैं।
🚨🇮🇱🇺🇸 11 of these beasts landed in Israel, U.S. F-22 Raptor jets This is significant It’s the first time in history the U.S. deploys fighter jets to Israeli soil for an operational, combat-oriented mission rather than joint exercises or trainingpic.twitter.com/FIPwAgkWo7 — Mario Nawfal (@MarioNawfal) February 24, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दोपहर तक इजरायल पहुंचेंगे और इसके बाद कई द्विपक्षीय कार्यक्रमों तथा उच्च‑स्तरीय वार्ताओं में भाग लेंगे। इस दौरान भारत और इजरायल के बीच रक्षा, तकनीकी सहयोग और सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौतों पर बातचीत और संभावित हस्ताक्षर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रधानमंत्री का यह इजरायल दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनका इजरायल का दूसरा दौरा है, जो 9 साल बाद हो रहा है। इस दौरान इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाया है। उन्होंने ‘हेक्सागन अलायंस’ नामक एक नए गठबंधन का प्रस्ताव रखा, जो दुनिया को चौंका देने वाला है। इस गठबंधन में भारत को एक मुख्य साझेदार के रूप में शामिल किया गया है, जो भविष्य के लिहाज से काफी अहम हो सकता है।
नेतन्याहू के मुताबिक, यह गठबंधन मध्य-पूर्व में पनप रही कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा बनाने के लिए है। इसमें भारत के अलावा इजरायल, ग्रीस और साइप्रस को भी प्रमुख साझेदार के रूप में पेश किया गया है। इस गठबंधन का उद्देश्य सुरक्षा, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और रक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है।
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यह ऐलान उस समय किया गया है जब पाकिस्तान और सऊदी अरब ने नाटो जैसी एक सुरक्षा संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे जानकार ‘इस्लामिक नाटो’ कह रहे हैं, और तुर्की के भी इसमें शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में हेक्सागन अलायंस का प्रस्ताव इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने की एक बड़ी रणनीतिक पहल मानी जा रही है।
Ans: प्रधानमंत्री मोदी का इजरायल दौरा भारत-इजरायल संबंधों को मजबूत करेगा, जिसमें रक्षा, तकनीकी सहयोग और सुरक्षा पर बातचीत की संभावना है।
Ans: हेक्सागन अलायंस एक नया सुरक्षा गठबंधन है जिसमें भारत, इजरायल, ग्रीस और साइप्रस शामिल हैं। इसका उद्देश्य मध्य-पूर्व में कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा बनाना है।
Ans: अमेरिका ने F-22 रैप्टर फाइटर जेट को इजरायल क्षेत्र में तैनात किया है ताकि युद्ध-सज्जित माहौल में अपनी सैन्य तैयारियों को प्रदर्शित किया जा सके और ईरान पर संभावित हमले की स्थिति तैयार की जा सके।
Ans: हेक्सागन अलायंस का गठन पाकिस्तान और सऊदी अरब द्वारा 'इस्लामिक नाटो' पर हस्ताक्षर करने के बाद हुआ, जिससे यह गठबंधन क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।