चीन को पछाड़ने के लिए अमेरिका का ‘बांग्लादेश मास्टरप्लान’, नई सरकार के साथ बड़े डील की तैयारी
US Bangladesh News: दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए अमेरिका ने बांग्लादेश की आगामी सरकार के लिए एक बड़े रक्षा सौदे की योजना बनाई है।
- Written By: अमन उपाध्याय
डोनाल्ड ट्रंप और मोहम्मद यूनुस, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
US Bangladesh Defense Deal News In Hindi: दक्षिण एशिया में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए अमेरिका ने एक बड़ी कूटनीतिक बिसात बिछाई है। बांग्लादेश में होने वाले आम चुनावों के बीच, अमेरिका ने घोषणा की है कि वह वहां की अगली सरकार के लिए एक बड़े डिफेंस डील (रक्षा समझौते) की प्लानिंग कर रहा है। ढाका में अमेरिकी राजदूत ब्रेंट टी. क्रिस्टेंसन ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का उद्देश्य बांग्लादेश को चीनी हथियारों के बजाय अमेरिकी और उसके सहयोगी देशों के आधुनिक सैन्य उपकरण उपलब्ध कराना है।
चीन की ‘ड्रोन फैक्ट्री’ और पाक से विमानों की डील
वॉशिंगटन की इस सक्रियता के पीछे चीन और बांग्लादेश के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग है। अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में भारत का प्रभाव कम हुआ है और चीन का हस्तक्षेप बढ़ा है। हाल ही में चीन ने बांग्लादेश के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत भारत की सीमा के पास एक ड्रोन फैक्ट्री बनाई जाएगी।
इसके अलावा, बांग्लादेश पाकिस्तान से JF-17 Thunder लड़ाकू विमान खरीदने पर भी बातचीत कर रहा है, जिसे चीन और पाकिस्तान ने मिलकर बनाया है। अमेरिकी राजदूत ने चेतावनी दी है कि वे बांग्लादेश को चीन के साथ ऐसे रक्षा समझौतों से जुड़े संभावित जोखिमों के बारे में आगाह करना चाहते हैं।
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भारत-बांग्लादेश संबंधों पर अमेरिका का रुख
अमेरिका चाहता है कि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे इसलिए राजदूत क्रिस्टेंसन ने भारत और बांग्लादेश के बीच बेहतर संबंधों की वकालत की है। हसीना के जाने के बाद दोनों देशों के बीच वीजा और क्रिकेट संबंधों में जो कड़वाहट आई है, अमेरिका उसे दूर होते देखना चाहता है।
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निवेश के लिए ‘साफ संकेत’ की मांग
रक्षा के साथ-साथ अमेरिका बांग्लादेश में आर्थिक निवेश भी बढ़ाना चाहता है। क्रिस्टेंसन के अनुसार, कई अमेरिकी कंपनियां बांग्लादेश में निवेश की इच्छुक हैं, लेकिन वे वहां की नई सरकार से व्यापार के लिए अनुकूल माहौल की उम्मीद करती हैं। वर्तमान में ऊंचे टैक्स और मुनाफा विदेश भेजने में आने वाली दिक्कतें निवेश में बड़ी बाधा हैं; यही कारण है कि 17.5 करोड़ की आबादी वाले इस देश में अब तक स्टारबक्स और मैकडॉनल्ड्स जैसे बड़े ब्रांड मौजूद नहीं हैं।
