
अमेरिकी सेना ने ड्रग बोट पर मिसाइल हमला किया, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Operation Southern Spear: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में नशीली दवाओं के खिलाफ छेड़ी गई जंग अब एक नए और घातक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को पूर्वी प्रशांत महासागर क्षेत्र में एक तथाकथित ‘ड्रग बोट’ पर मिसाइल से सटीक हमला किया जिसमें जहाज पूरी तरह तबाह हो गया। यूएस साउदर्न कमांड द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहा।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे एक जहाज समुद्र में तेजी से बढ़ रहा है और अचानक एक भीषण विस्फोट के बाद वह आग की लपटों के साथ धुएं के गुबार में तब्दील हो जाता है। सेना ने कोस्ट गार्ड को जीवित बचे व्यक्ति की तलाश के लिए सूचित किया है। हालांकि, अभी तक किसी भी देश ने आधिकारिक तौर पर इस जहाज पर अपना दावा नहीं किया है।
US BOMBS ‘drug boat’ in Eastern Pacific, KILLS 2 pic.twitter.com/GNYbKu5x09 — RT (@RT_com) January 23, 2026
यह हमला ट्रंप प्रशासन की वेनेजुएला नीति और ‘ऑपरेशन साउदर्न स्पीयर’ का हिस्सा माना जा रहा है। गौरतलब है कि 3 जनवरी को वेनेजुएला की राजधानी काराकस में एक बड़े ऑपरेशन के दौरान राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें वर्तमान में न्यूयॉर्क में ड्रग तस्करी के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी सेना ने समुद्र में अपना आक्रामक रुख काफी तेज कर दिया है। आंकड़ों के अनुसार, सितंबर की शुरुआत से अब तक दक्षिण अमेरिकी जलक्षेत्र में संदिग्ध ड्रग नावों पर 36 हमले हो चुके हैं, जिनमें कम से कम 117 लोग मारे गए हैं। इनमें से अधिकांश हमले कैरेबियन सागर में अंजाम दिए गए हैं। ट्रंप प्रशासन का पूरा ध्यान अब वेनेजुएला से जुड़े प्रतिबंधित तेल टैंकरों और तस्करी के जहाजों को जब्त करने या नष्ट करने पर केंद्रित है।
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इस सैन्य कार्रवाई के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने गुरुवार को दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) को संबोधित करते हुए अपनी उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने दावा किया कि इन सख्त सैन्य अभियानों की मदद से हमने पानी के रास्ते आने वाली लगभग 100 प्रतिशत ड्रग्स को रोक दिया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन घातक हमलों की काफी आलोचना भी हो रही है, जहाँ मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।






