ब्रिटिश PM कीर स्टार्मर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Keir Starmer On US Iran War: लंदन से एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संदेश देते हुए ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने घोषणा की है कि ब्रिटेन, ईरान में चल रहे सैन्य संघर्ष में शामिल नहीं होगा। बुधवार को अपने संबोधन में उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि ‘यह हमारा युद्ध नहीं है’ और इसमें शामिल होना ब्रिटेन के राष्ट्रीय हित में नहीं है।
हालांकि, प्रधानमंत्री ने यह जरूर माना कि इस संघर्ष का असर ब्रिटेन के भविष्य पर पड़ेगा लेकिन उन्होंने देश को आश्वस्त किया कि ब्रिटेन इस ‘आर्थिक तूफान’ को झेलने के लिए पूरी तरह तैयार है।
स्टार्मर ने मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और उससे उत्पन्न होने वाली महंगाई पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में जीवन-यापन की लागत को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज‘ को फिर से खोलना है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक जीवन रेखा है। स्टार्मर के अनुसार, ब्रिटेन इस समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाने और तनाव कम करने के लिए हर संभव कूटनीतिक रास्ता अपना रहा है।
इस संकट से निपटने के लिए ब्रिटेन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी कूटनीतिक पहल शुरू की है। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि विदेश सचिव यवेट कूपर इस सप्ताह के अंत में एक उच्च स्तरीय बैठक की मेजबानी करेंगी जिसमें पहली बार कई देश एक साथ जुटेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य समुद्री आवाजाही की आजादी बहाल करना और फंसे हुए जहाजों व नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। गौरतलब है कि ब्रिटेन ने खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए 35 देशों को एक साझा मंच पर एकजुट करने में सफलता प्राप्त की है।
युद्ध की वैश्विक छाया के बीच Keir Starmer कहा कि सरकार द्वारा बजट में लिए गए फैसलों की वजह से आज से जनता के बिजली के बिल कम हो जाएंगे। स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि ईरान संकट के कारण होने वाले खर्चों का आकलन जुलाई तक पहले ही किया जा चुका है, जिससे घरेलू कीमतों पर तत्काल कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब Iran-US संघर्ष के कारण पूरी दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर हाहाकार मचा है। इसी बीच ऑस्ट्रेलिया ने भी अपने नागरिकों के लिए ‘नेशनल फ्यूल सिक्योरिटी प्लान’ को मंजूरी दी है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कीर स्टार्मर के बीच कूटनीतिक मतभेद भी चर्चा में रहे हैं जहां ट्रंप ने पूर्व में ब्रिटेन के साथ सहयोग को लेकर कड़े बयान दिए थे। फिलहाल ब्रिटेन ने युद्ध से दूरी बनाते हुए कूटनीति और समुद्री सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बताया है।