तुर्की का पाकिस्तान पर ‘यू-टर्न’! भारत से दोस्ती के लिए क्यों मजबूर हुए एर्दोगन? जानें अंकारा की नई रणनीति
Turkey India Relations: तुर्की ने भारत के साथ संबंधों को सुधारने के लिए बड़ी पहल की है। आर्थिक संकट और भारत की आक्रामक कूटनीति के चलते पाकिस्तान को दरकिनार कर नई दिल्ली के साथ हाथ मिलाना चाहता है।
- Written By: अमन उपाध्याय
तैयप एर्दोगन और पीएम मोदी, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Turkey India Relations New Diplomacy: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। लंबे समय तक पाकिस्तान का साथ देने और कश्मीर जैसे मुद्दों पर भारत विरोधी रुख अपनाने वाला तुर्की अब अपनी रणनीति बदलने को मजबूर हुआ है। तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान के हालिया बयानों ने संकेत दिया है कि अंकारा अब भारत के साथ अपने रिश्तों को पाकिस्तान के चश्मे से देखना बंद करना चाहता है।
भारत की ‘जैसे को तैसा’ नीति का असर
तुर्की के इस बदले हुए व्यवहार के पीछे भारत की सक्रिय और आक्रामक कूटनीति को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से भारत ने पूर्वी भूमध्यसागर में तुर्की के पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियो ग्रीस, साइप्रस और आर्मेनिया के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को काफी मजबूत किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीकी पिछले साल की साइप्रस यात्रा और वहां ब्रह्मोस मिसाइलें व ड्रोन इकोसिस्टम विकसित करने में सहयोग की पेशकश ने तुर्की को स्पष्ट संदेश दिया है। तुर्की के रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-साइप्रस और भारत-ग्रीस सैन्य समझौते अंकारा के लिए एक बड़ा झटका हैं।
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तुर्की की क्या है वजह?
तुर्की की इस नई रणनीति के पीछे सबसे बड़ी वजह उसका आंतरिक आर्थिक संकट है। अंकारा अपनी कॉर्पोरेट संपत्तियों की रक्षा करना चाहता है और उसे डर है कि भारत उसकी कंपनियों के खिलाफ कड़े व्यापारिक और आर्थिक कदम उठा सकता है। इसी दबाव के चलते तुर्की अब एक व्यावहारिक और ‘लेन-देन’ पर आधारित कूटनीति की नींव रख रहा है। तुर्की के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया है कि भारत के साथ उनका कोई सीमा विवाद या जन्मजात द्विपक्षीय विवाद नहीं है, इसलिए दोनों देशों को आपसी हितों पर ध्यान देना चाहिए।
पाकिस्तान से दूरी बनाने की कोशिश?
तुर्की अब अपनी विदेश नीति को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की कोशिश कर रहा है। वह एक तरफ ‘इस्लामी सहयोग संगठन’ (OIC) में अपनी नेतृत्वकारी भूमिका बनाए रखना चाहता है और पाकिस्तान को रक्षा आपूर्ति जारी रखना चाहता है, लेकिन दूसरी तरफ भारत जैसे विशाल बाजार के साथ लाभदायक साझेदारी भी चाहता है। 12वें विदेश कार्यालय परामर्श (FOC) के दौरान तुर्की ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तानको लेकर मतभेद होने के बावजूद भारत और तुर्की को सहयोग करना चाहिए।
सतर्कता के साथ संवाद
तुर्की के इस बदले हुए सुर के बावजूद भारतीय खुफिया एजेंसियां और विदेश मंत्रालय काफी सतर्क हैं। भारत ने साफ कर दिया है कि रिश्ते केवल बातचीत से नहीं, बल्कि एक-दूसरे की सुरक्षा और संवेदनशीलता का सम्मान करने से बनते हैं।’
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नई दिल्ली इस बात पर करीब से नजर रख रही है कि तुर्की द्वारा पाकिस्तान को दिए जा रहे सैन्य साजो-सामान का इस क्षेत्र के शक्ति-संतुलन पर क्या असर पड़ता है। जब तक तुर्की अपना भारत विरोधी रुख और पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक भारत संबंधों को पूरी तरह सामान्य करने की जल्दबाजी में नहीं है।
