जंतर-मंतर पर प्रदर्शन खत्म…अब क्या करेगी कॉकरोच जनता पार्टी? राजनीति में एंट्री करेंगे दीपके! जानें अगला कदम
CJP After Jantar Mantar Protest: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP का जंतर-मंतर आंदोलन खत्म हो गया। सवाल है कि क्या संगठन राजनीतिक पार्टी बनेगा या छात्र आंदोलनों के जरिए अपनी भूमिका जारी रखेगा।
- Written By: अक्षय साहू
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके (सोर्स- सोशल मीडिया)
Cockroach Janata Party Future: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन खत्म हो गया है। प्रदर्शन समाप्त होने के बाद नई दिल्ली नगर निगम के कर्मचारी प्रदर्शन क्षेत्र की साफ-सफाई करने में जुटे हैं। वहीं, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके समर्थक भी वापस लौट चुके हैं। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि सीजेपी अब आगे क्या करेगी? क्या दीपके कोई अपनी कोई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे या किसी दूसरी पार्टी में शामिल होंगे?
जंतर-मंतर पर चले इस आंदोलन को पूरी तरह गैर-राजनीतिक बताया गया, हालांकि इसके मंच पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी, शिवसेना (उद्धव गुट) और एनसीपी (शरद पवार गुट) सहित कई विपक्षी नेताओं ने हिस्सा लिया। फिल्म और खेल जगत की कुछ हस्तियां भी आंदोलन के समर्थन में दिखाई दीं। इसके बावजूद CJP ने खुद को किसी राजनीतिक दल के रूप में पेश नहीं किया।
आंदोलन ने छात्रों में नई ऊर्जा पैदा की
जेएनयू के सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज के प्रोफेसर डॉ. सुधीर कुमार ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि, CJP ने अब तक अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई संकेत नहीं दिया है। उनके मुताबिक, इस आंदोलन ने छात्रों में नई ऊर्जा पैदा की है। पिछले कई वर्षों में शिक्षा से जुड़े कई आंदोलन हुए, लेकिन CJP ने उन्हें फिर से सक्रिय करने का काम किया। साथ ही विपक्षी दलों ने भी छात्रों की मांगों को गंभीरता से उठाना शुरू किया।
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वहीं, वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष का कहना है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने एक ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उनके मुताबिक, इस आंदोलन ने यह संदेश दिया कि लोकतांत्रिक तरीके से सरकार पर दबाव बनाया जा सकता है। हालांकि उनका मानना है कि CJP को राजनीतिक पार्टी नहीं बनना चाहिए। उनके अनुसार, यदि यह आंदोलन राजनीतिक दल में बदलता है तो इसकी नैतिक ताकत और विश्वसनीयता कमजोर पड़ सकती है।
कई राजनीतिक दल छात्र आंदोलनों से ही निकले
एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज के पूर्व निदेशक डीएम दिवाकर की राय अलग है। उनका कहना है कि भारत में कई राजनीतिक दल छात्र आंदोलनों से ही निकले हैं। उन्होंने 1974 के जेपी आंदोलन और बाद में बनी जनता पार्टी का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, CJP भले ही खुद को राजनीतिक दल नहीं कह रही हो, लेकिन उसके मुद्दे और बयान राजनीतिक हैं। इसलिए भविष्य में इसके राजनीतिक मंच बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
सोशल मीडिया से सड़क तक का सफर
CJP की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक व्यंग्य के रूप में हुई थी। मई में सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी के बाद ‘कॉकरोच’ शब्द सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। इसके बाद CJP नाम से वेबसाइट बनी, सोशल मीडिया पर लाखों लोग जुड़े और नीट पेपर लीक के मुद्दे पर अभियान शुरू हुआ। 6 जून को पहला प्रदर्शन हुआ और 20 जून से जंतर-मंतर पर लगातार आंदोलन शुरू हो गया। आखिरकार एक महीने बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया।
विश्लेषकों का कहना है कि इस आंदोलन ने यह दिखाया कि आज के युवा केवल वोट देने तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे नीतियों और फैसलों में अपनी भागीदारी भी चाहते हैं। वहीं आशुतोष का मानना है कि CJP ने जेन-जी के अंदर लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत किया है। इस आंदोलन ने यह धारणा भी बदली कि आज के युवा केवल सोशल मीडिया तक सीमित हैं।
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CJP का आगे क्या होगा?
फिलहाल CJP का आंदोलन समाप्त हो चुका है, लेकिन इसकी चर्चा अभी खत्म नहीं हुई है। कुछ विशेषज्ञ इसे एक सफल छात्र आंदोलन मानते हैं, जबकि कुछ इसके भीतर भविष्य की राजनीतिक ताकत देखते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि CJP नए मुद्दों पर फिर सक्रिय होती है या इसके उठाए गए मुद्दों को विपक्षी दल आगे बढ़ाते हैं। इतना तय है कि इस आंदोलन ने देश में छात्र राजनीति और लोकतांत्रिक भागीदारी पर नई बहस जरूर शुरू कर दी है।
