

खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले की मिरयान तहसील में शनिवार सुबह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों ने पाकिस्तानी सेना के एक काफिले पर घात लगाकर हमला किया। आईईडी धमाका और गोलीबारी में कम से कम 10 सैनिक मारे गए, जबकि कई अन्य घायल हुए। धमाके में सेना का एक वाहन पूरी तरह नष्ट हो गया। पाकिस्तान सेना के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने घटना की पुष्टि की है।
रिपोर्टों के मुताबिक, हमला उस समय हुआ जब सेना का काफिला सीमावर्ती इलाके से गुजर रहा था। लगभग 15 से 20 हथियारबंद आतंकियों ने सड़क किनारे छिपकर पहले विस्फोट किया और फिर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। सामने आई वीडियो फुटेज में धुआं और क्षतिग्रस्त वाहन दिखाई दे रहे हैं, जो हमले की गंभीरता को दर्शाते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, विस्फोट की आवाज मीलों दूर तक सुनाई दी और इलाके में दहशत फैल गई।
जानकारी के मुताबिक, यह हमला अफगानिस्तान सीमा के निकट हुआ है, जहां हाल के महीनों में टीटीपी की गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं। 2025 में अब तक खैबर पख्तूनख्वा में 600 से अधिक आतंकी घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें अधिकतर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इस हमले से एक दिन पहले टीटीपी ने खैबर पख्तूनख्वा में एक पाकिस्तानी सैन्य चौकी पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद सैनिकों को चौकी छोड़नी पड़ी। सितंबर में वजीरिस्तान में इसी तरह के हमले में 12 सैनिक मारे गए थे, जबकि उसी महीने बन्नू में फेडरल कांस्टेबुलरी मुख्यालय पर हुए टीटीपी के हमले में 6 जवानों की मौत हुई थी।
टीटीपी ने इसका एक वीडियो भी शेयर किया है। जिसमें उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पाकिस्तानी सेना को खदेड़ दिया और आसिम मुनीर के सैनिकों ने उनका सामना करने के बजाय वहां से भागने को ही बेहतर समझा। टीटीपी के मुताबिक, पाकिस्तानी सैनिक न तो उन्हें चुनौती दे पाए और न ही उस चौकी को बचा पाए।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और अफगानिस्तान को अपनी सरजमीं के दुरुपयोग से बचने की सख्त चेतावनी दी।