

Trump Vance disagreement on Iran strikes: ईरान में खामेनेई शासन के खिलाफ भड़की विरोध की आग अब वैश्विक कूटनीति और युद्ध की आहट में बदल चुकी है। प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसक कार्रवाई में 2,000 से अधिक लोगों की मौत के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 'बहुत जोरदार झटका' देने की चेतावनी दी है। व्हाइट हाउस में इस समय युद्ध और शांति को लेकर मंथन जारी है, जहां ट्रंप सैन्य विकल्प पर विचार कर रहे हैं। दूसरी ओर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रूबियो फिलहाल कूटनीतिक दबाव बनाने के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं।
ईरान में मानवाधिकारों के हनन और परमाणु ठिकानों को लेकर ट्रंप प्रशासन के भीतर दो फाड़ की स्थिति बनी हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर जुल्म नहीं रुका, तो वे मिलिट्री एक्शन से पीछे नहीं हटेंगे। वहीं जेडी वेंस का मानना है कि सीधे युद्ध के बजाय कूटनीति और कड़े प्रतिबंधों के जरिए ईरान को बातचीत की मेज पर लाया जाना चाहिए।
ट्रंप ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए एक बड़ा दांव खेलते हुए 'सेकेंडरी टैरिफ' की घोषणा कर दी है। इसके तहत ईरान से व्यापार करने वाले किसी भी देश पर अमेरिका 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा। इस फैसले का उद्देश्य ईरान को अंतरराष्ट्रीय व्यापार से पूरी तरह अलग-थलग करना है, जिससे उसके तेल निर्यात और विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी संकट मंडराने लगा है।
ईरान में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों ने भी सख्त कदम उठाए हैं। इन देशों ने तेहरान के साथ अपने कूटनीतिक रिश्तों को 'डाउनग्रेड' करने का फैसला किया है और अपने गैर-जरूरी स्टाफ को वापस बुला लिया है। अमेरिका ने भी अपने नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ने की सलाह दी है, जो इस क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव की ओर इशारा कर रहा है।
ट्रंप के नए टैरिफ आदेश का सबसे गहरा असर भारत-ईरान व्यापार पर पड़ने की संभावना है, जो सालाना करीब 2 बिलियन डॉलर का है। भारत बड़े पैमाने पर ईरान को चाय, चावल और दवाइयां भेजता है और बदले में पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करता है। अगर अमेरिका भारत के निर्यात पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाता है, तो पहले से लागू 50 प्रतिशत के साथ यह कुल 75 प्रतिशत हो जाएगा, जिससे व्यापार करना नामुमकिन होगा।
युद्ध की आशंकाओं के बीच कतर स्थित अमेरिका के अल उदैयद मिलिट्री बेस पर फाइटर जेट्स और ट्रांसपोर्ट विमानों की भारी आवाजाही देखी गई है। यह हलचल बताती है कि कूटनीति के साथ-साथ अमेरिका ने अपनी सैन्य तैयारी भी पूरी कर ली है। ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों से अपना आंदोलन जारी रखने की अपील करते हुए कहा है कि 'मदद बहुत जल्द पहुंचने वाली है', जिसने खामेनेई सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं।