US Cuba Regime Change Plan: वेनेजुएला में निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप की नजर क्यूबा पर टिक गई है। अमेरिकी प्रशासन वहां की कम्युनिस्ट सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए कई कड़े विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। ट्रंप की टीम तेल आयात पर पूर्ण नाकेबंदी लगाने जैसी आक्रामक रणनीति अपनाकर हवाना में बड़ा बदलाव लाना चाहती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्यूबा की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाना और वहां के नेतृत्व को पूरी तरह बदलना है।
ट्रंप टीम से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस संभावित एक्शन का अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो पुरजोर समर्थन कर रहे हैं। रुबियो लंबे समय से क्यूबा की सरकार के खिलाफ सख्त नीतियों और कड़े आर्थिक फैसलों की वकालत करते रहे हैं। क्यूबा मूल के अमेरिकी नागरिक होने के नाते वे हवाना के प्रति बहुत कठोर रुख रखते हैं और इसे जरूरी मानते हैं।
हाल ही में आई रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप प्रशासन क्यूबा में सत्ता परिवर्तन के लिए तेल आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा सकता है। वेनेजुएला से क्यूबा को मिलने वाले तेल और धन की आपूर्ति को पहले ही रोकने की धमकी दी जा चुकी है। अगर यह नाकेबंदी लागू होती है तो क्यूबा की पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था के लिए यह स्थिति बहुत विनाशकारी होगी।
ट्रंप के क्यूबा से नाराज होने का एक बड़ा कारण वहां की कम्युनिस्ट सरकार की चीन और रूस के साथ बढ़ती नजदीकियां हैं। अमेरिका इसे अपने पड़ोस में एक बड़ी सुरक्षा चुनौती के रूप में देखता है जो उसके हितों के खिलाफ है। इन वैश्विक शक्तियों के साथ क्यूबा के गहरे संबंध अमेरिका के लिए एक कांटे की तरह चुभ रहे हैं।
क्यूबा की मौजूदा आर्थिक स्थिति बहुत खराब है और वहां के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज कैनेल की पकड़ भी कमजोर हो रही है। तेल की आपूर्ति बंद होने से देश में मानवीय संकट पैदा होने का खतरा है लेकिन प्रशासन इसे जरूरी समझ रहा है। हालांकि प्रशासन के भीतर इस बात पर बहस जारी है कि क्या पूर्ण नाकेबंदी करना इस समय वाकई सही होगा।
अमेरिकी सख्ती के बाद क्यूबा ने अपनी जरूरतों के लिए मेक्सिको की ओर हाथ बढ़ाया है और वहां से मदद की उम्मीद की है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मेक्सिको से मिलने वाला तेल क्यूबा की विशाल जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। इस कमी के कारण क्यूबा को अपनी बिजली और परिवहन व्यवस्था बनाए रखने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
अगर ट्रंप प्रशासन अपनी इस योजना पर आगे बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। चीन ने पहले ही क्यूबा के समर्थन में बयान देते हुए किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का कड़ा विरोध करने की बात कही है। अब देखना यह होगा कि क्या ट्रंप अपने इस कड़े फैसले से क्यूबा में सत्ता परिवर्तन करने में सफल हो पाएंगे।