भारत-ईयू व्यापार समझौते को Norway का समर्थन… ट्रंप के नोबेल दावों पर कड़ा जवाब

Trade Partnership Deal: नॉर्वे ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को ऐतिहासिक बताया है। राजदूत स्टेनर ने ट्रंप की आर्थिक नीतियों की आलोचना की और नोबेल पुरस्कार प्रक्रिया में हस्तक्षेप से साफ इनकार किया।
Norway Supports India-EU Trade Agreement: Responds to Trump's Nobel Claims
नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Norway Response To Trump Nobel: नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच आगामी मुक्त व्यापार समझौते को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि नॉर्वे ईयू का हिस्सा नहीं है, फिर भी वह आर्थिक एकीकरण और रणनीतिक भारत-नॉर्वे व्यापार साझेदारी का पक्षधर है। राजदूत ने वैश्विक संरक्षणवाद पर चिंता जताते हुए बहुपक्षीय नियम-आधारित व्यापार प्रणाली की वकालत की और अमेरिकी दावों पर प्रतिक्रिया दी। आइये जानते हैं ट्रम्प के नोबेल पर नॉर्वे की प्रतिक्रिया और दोनों देशों के बीच भविष्य के तकनीकी सहयोग पर आधारित विषयों के बारे में।

भारत-ईयू व्यापार समझौते को मिला समर्थन

नॉर्वे की भारत में राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच होने वाले मुक्त व्यापार समझौते (AFTA) को एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने एक विशेष इंटरव्यू में कहा कि यह समझौता न केवल भारत और ईयू के लिए बल्कि पूरे यूरोपीय क्षेत्र के व्यापारिक संबंधों के लिए ऐतिहासिक होगा। स्टेनर के अनुसार, इस आर्थिक जुड़ाव से भारत और नॉर्वे के द्विपक्षीय संबंधों में भी सकारात्मक और स्थिर गति देखने को मिलेगी। राजदूत ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच कोई भी समझौता यूरोप के साथ भारत के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। चूंकि यूरोपीय संघ नॉर्वे का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इसलिए भारत-यूरोप के बीच घनिष्ठ आर्थिक एकीकरण ओस्लो के लिए भी लाभदायक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नए व्यापार समझौतों के कारण दोनों पक्षों की व्यापारिक रुचि काफी बढ़ रही है।

ट्रंप की नीतियों और संरक्षणवाद पर रुख

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए नॉर्वे की राजदूत ने स्पष्ट रूप से मुक्त व्यापार और एक खुली अर्थव्यवस्था का कड़ा समर्थन किया है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों और दुनिया में फिर से बढ़ते टैरिफ युद्ध एवं संरक्षणवाद पर अपनी असहमति व्यक्त की है। स्टेनर का मानना है कि व्यापारिक बाधाएं बढ़ाने के बजाय नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देना वैश्विक अनिश्चितता का सही समाधान है।

नोबेल शांति पुरस्कार और ट्रंप के दावे

राजदूत स्टेनर ने राष्ट्रपति ट्रंप के नोबेल शांति पुरस्कार के दावों से जुड़े विवाद पर नॉर्वे सरकार का आधिकारिक और स्पष्ट पक्ष दुनिया के सामने रखा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता का चयन करने वाली समिति एक पूरी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष निकाय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समिति के निर्णयों में नॉर्वे सरकार या किसी अन्य प्राधिकरण का कोई हस्तक्षेप नहीं होता।

नॉर्वे सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इस पुरस्कार की अंतरराष्ट्रीय गरिमा और इसकी स्वतंत्रता हर स्थिति में भविष्य में भी बनी रहे। राजदूत ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी दावों पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि नॉर्वे ग्रीनलैंड पर डेनमार्क की संप्रभुता का पूरा समर्थन करता है। आर्कटिक सुरक्षा के मामले में नॉर्वे नाटो के ढांचे के भीतर रहकर गठबंधन की मजबूती पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

AI शिखर सम्मेलन और पीएम मोदी की यात्रा

आगामी महीनों में नॉर्वे भारत में आयोजित होने वाले महत्वपूर्ण AI शिखर सम्मेलन में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज करने के लिए पूरी तरह तैयार है। नॉर्वे की डिजिटलीकरण मंत्री एक बड़े प्रतिनिधिमंडल और प्रमुख व्यापारिक नेताओं के साथ इस तकनीकी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भारत आएंगी। ओस्लो भारत की "AI के लोकतंत्रीकरण" की पहल और प्रौद्योगिकी सहयोग को गहरा करने के व्यापक लक्ष्य का समर्थन करता है।

इसके अलावा, इस वर्ष के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नॉर्वे जाने की प्रबल संभावना है। यह यात्रा नई दिल्ली और ओस्लो के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक तालमेल को और अधिक मजबूती प्रदान करने का काम करेगी। नॉर्वे यूक्रेन और गाजा में शांति लाने के सभी वास्तविक प्रयासों का भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन करता है।

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