पुतिन के आगे ट्रंप ने मानी हार, यूक्रेन पर 99 साल तक होगा रूस कब्जा, NATO से भी बाहर
Russia-Ukraine War: डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन की आगामी बैठक से यूक्रेन को लेकर बड़े समझौते की अटकलें तेज हो गई हैं, जिससे राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की की चिंता और भी बढ़ गई है।
- Written By: अक्षय साहू
यूएई में पुतिन से मिलेंगे ट्रंप (फोटो- सोशल मीडिया)
Trump Putin Meeting: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अगले हफ्ते यूएई में बैठक करने वाले हैं। इसी बीच इस मीडिंट से जुड़ी हुई कुछ बातें सामने आई है जिसने के यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की की धड़कने बढ़ा दी है। कहा जा रहा है कि ट्रंप ने पुतिन को बातचीत की मेज कर लाने के लिए ऐसे वादे किए हैं, जो अगर पूरे हो जाते हैं तो यूक्रेन को अपनी जमीन से हाथ धोना पड़ सकता है।
ट्रंप और पुतिन के बीच यूक्रेन को लेकर पिछले कई महीनों से तनातनी चल रही है। ट्रंप ने हाल ही में रूस को 50 दिन का अल्टीमेटम दिया था। जिसका रूस ने विरोध किया था। लेकिन फिर अचानाक खबर आई कि दोनों नेता युद्ध समाप्त करने को लेकर बैठक करने वाले हैं। इसे बाद से ही लोगों को शक होने लगा कि दोनों मिलकर यूक्रेन के साथ कोई खेल कर सकते हैं। जो अब सच साबित होता नजर आ रहा है। क्योंकि इससे पहले ट्रंप कई बार पुतिन की आलोचना कर चुके हैं।
समझौते की संभावनाएं बढ़ी
दुनिया के दो प्रमुख नेताओं के बीच तनाव अब कम होने लगा है, खासकर जब से ट्रंप के विशेष दूत विटकॉफ ने रूस का दौरा किया। विटकॉफ ने पुतिन को ऐसे कई प्रस्ताव दिए हैं जिनसे यूक्रेन और रूस के बीच समझौते की संभावनाएं बढ़ी हैं। इनमें नाटो के विस्तार को रोकने का भरोसा भी शामिल है, जिससे पुतिन इस बैठक के लिए उत्साहित हैं और इसे यूएई में आयोजित करने की बात कर रहे हैं।
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ट्रंप ने पुतिन से कई कई वादे
ट्रंप ने पुतिन से बैठक से पहले कई बड़े वादे किए हैं। उन्होंने पुतिन से दावा किया है कि यूक्रेन में पूरी शांति की जगह दोनों पक्ष सीजफायर पर सहमत होंगे। जमीन पर रूस के कब्जे को कायम रखा जाएगा, हालांकि उसे कानूनी मान्यता नहीं दी जाएगी। इसके बावजूद यह कब्जा 49 से 99 साल तक बरकरार रहेगा। साथ ही, रूस से गैस और तेल के आयात को लंबे समय तक अनुमति दी जाएगी। सबसे अहम बात ये है कि ट्रंप ने पुतिन को गारंटी दी है कि किसी भी हाल में नाटो का विस्तार नहीं किया जाएगा।
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जानकारी के मुताबिक, ट्र्ंप के साथ होने वाली बैठक को लेकर पुतिन काफी उत्साहित बताए जा रहे हैं। पुतिन इसे अपनी जीत की तरह देख रहे हैं। अगर दोनों देशों की बीच यह समझौता हो जाता है कि तो यूक्रेन को इससे बड़ा झटका लगने की संभावना है।
