अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Trump Iran War NATO Allies Refuse: ईरान के खिलाफ जारी युद्ध के 18वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकेले पड़ने के संकेतों के बीच ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका को अब किसी भी देश की सैन्य सहायता की आवश्यकता नहीं है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने नाटो देशों सहित चीन, रूस और जापान से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने के लिए मदद मांगी थी। हालांकि, लगभग सभी देशों ने इस सैन्य अभियान में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने ‘ट्रूथ सोशल’ पर लिखा कि वे इस कदम से आश्चर्यचकित नहीं हैं। उन्होंने नाटो को एक ‘एकतरफा व्यवस्था’ बताया जहां अमेरिका अन्य देशों की सुरक्षा पर अरबों डॉलर खर्च करता है लेकिन जरूरत पड़ने पर उसे मदद नहीं मिलती।
US President Donald Trump posts on Truth Social -"The United States has been informed by most of our NATO “Allies” that they don’t want to get involved with our Military Operation against the Terrorist Regime of Iran, in the Middle East, this, despite the fact that almost every… pic.twitter.com/6Yt3gqzHaR — ANI (@ANI) March 17, 2026
सहयोगियों की आलोचना करने के साथ-साथ डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध के मैदान में बड़ी सफलता का दावा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में ईरान की नौसेना, वायु सेना और उनके रडार तंत्र पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरान के नेता अब इस स्थिति में नहीं हैं कि वे अमेरिका या मध्य पूर्व के किसी अन्य देश को धमकी दे सकें।
ट्रंप ने गर्व से कहा कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति के रूप में उन्हें अब जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया या किसी भी नाटो देश की सहायता की न तो जरूरत है और न ही वे इसकी इच्छा रखते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका अपनी सैन्य सफलताएं अकेले दम पर हासिल करने में सक्षम है।
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गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी, 2026 को ईरान पर हमला किया था। इसके जवाब में ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया था। वहीं, अमेरिका के भीतर भी इस युद्ध को लेकर विरोध के स्वर उठ रहे हैं। हाल ही में एक शीर्ष अमेरिकी अधिकारी जोसेफ केंट ने यह आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया कि यह युद्ध इजरायल के दबाव में शुरू किया गया है।