डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स- सोशल मीडिया)
Middle East Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों को बताया है कि वह ईरान के साथ जारी युद्ध को लंबा नहीं खींचना चाहते और आने वाले कुछ हफ्तों में इसे खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका मकसद है कि यह संघर्ष समाप्त होने के बाद वे अपने अन्य घरेलू और राजनीतिक एजेंडों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
ट्रंप का मानना है कि युद्ध अपने अंतिम चरण में है और उन्होंने अपने सहयोगियों को 4-6 हफ्तों की टाइमलाइन पर टिके रहने के निर्देश दिए हैं। व्हाइट हाउस मई के मध्य में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बीजिंग में शिखर सम्मेलन की योजना बना रहा है और उम्मीद है कि तब तक ईरान युद्ध समाप्त हो जाएगा।
हालांकि, युद्ध को जल्दी खत्म करना आसान नहीं है। शांति वार्ता अभी शुरुआती चरण में है और कोई ठोस समझौता नहीं हुआ। डोनाल्ड ट्रंप कूटनीतिक रास्ते तलाश रहे हैं, जबकि अमेरिका ने मध्यपूर्व में अतिरिक्त सैनिक तैनात कर दबाव भी बढ़ाया है। ट्रंप ने सलाहकारों के सामने यह भी कहा कि किसी समझौते के तहत अमेरिका को ईरान के तेल तक पहुंच मिल सकती है, लेकिन इस पर कोई ठोस योजना अभी नहीं बनी है।
जमीनी सैनिक भेजने का विकल्प पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है, लेकिन इससे युद्ध लंबा खिंच सकता है। अब तक लगभग 300 अमेरिकी सैनिक घायल और 13 की मौत हो चुकी है, जो ट्रंप की चिंता का बड़ा कारण है। व्हाइट हाउस में रणनीति को लेकर मतभेद हैं कुछ सहयोगी कूटनीतिक समाधान चाहते हैं, जबकि कुछ सख्त सैन्य कार्रवाई और ईरान में शासन परिवर्तन की बात कर रहे हैं।
यदि जल्द समझौता नहीं होता, तो होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट जारी रह सकती है, जिससे वैश्विक तेल बाजार प्रभावित होगा। वहीं, इजरायल और खाड़ी देशों की भूमिका इस संघर्ष को और जटिल बना रही है। अमेरिका में भी युद्ध का असर दिख रहा है। बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत के कारण आगामी चुनावों में ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण होती जा रही है।
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व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान समझौते के लिए आगे नहीं बढ़ता, तो अमेरिका पहले से भी कड़ा हमला कर सकता है। ट्रंप खुद भी मानते हैं कि युद्ध उनके अन्य एजेंडों से ध्यान भटका रहा है और जल्द इसका हल निकालना उनके लिए प्राथमिकता है।