ट्रंप के ‘नर्क’ वाले वीडियो पर अमेरिका की सफाई: भारत को बताया ‘महान देश’, जानें विदेश मंत्रालय ने और क्या कहा
Trump India Video Controversy: डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के लिए अपमानजनक शब्दों वाले वीडियो को साझा करने के बाद उपजे विवाद पर अमेरिकी दूतावास ने सफाई दी है।
- Written By: अमन उपाध्याय
नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मिडिया)
Trump India Video Controversy US Embassy Clarification: अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। हाल ही में ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो ने न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी, बल्कि भारत और अमेरिका के राजनयिक संबंधों में भी कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति पैदा कर दी। हालांकि, विवाद बढ़ता देख अब अमेरिकी दूतावास ने इस पर डैमेज कंट्रोल की कोशिशें शुरू कर दी हैं और ट्रंप की ओर से भारत के प्रति सम्मान व्यक्त किया है।
क्या था पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक कट्टरपंथी रूढ़िवादी लेखक और रेडियो होस्ट माइकल सैवेज का वीडियो साझा किया। इस वीडियो में सैवेज ने अमेरिका में जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता, जिसे ‘बर्थराइट सिटीजनशिप’ कहा जाता है, की तीखी आलोचना की थी।
अपनी बात रखने के दौरान सैवेज ने भारत और चीन जैसे देशों के लिए ‘हेलहोल’ (नर्क जैसा स्थान) जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी नागरिक अमेरिकी कानूनों की खामियों का फायदा उठाकर अपनी प्रेगनेंसी के अंतिम महीनों में अमेरिका आते हैं ताकि उनके बच्चों को वहां की नागरिकता मिल सके।
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अमेरिकी दूतावास की सफाई
जैसे ही यह मामला सुर्खियों में आया, अमेरिका में मौजूद भारतीय समुदाय और कूटनीतिक हलकों में नाराजगी देखी गई। स्थिति को संभालते हुए अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने एक आधिकारिक बयान जारी किया। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि डोनाल्ड ट्रंप भारत को एक ‘महान देश’ मानते हैं और भारत के शीर्ष नेतृत्व में उनका एक बेहद करीबी और अच्छा दोस्त है।
दूतावास की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि ट्रंप के निजी सोशल मीडिया हैंडल से साझा किया गया वीडियो किसी लेखक के विचार हो सकते हैं लेकिन वे भारत के प्रति ट्रंप के वास्तविक नजरिए को नहीं दर्शाते।
भारत का क्या रहा रुख?
इस संवेदनशील मुद्दे पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने बेहद सधे हुए अंदाज में अपनी प्रतिक्रिया दी है। साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से इस वीडियो के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने बहुत संक्षिप्त में अपनी बात रखी।
जायसवाल ने कहा, ‘हमने इस तरह की कुछ रिपोर्ट्स देखी हैं और फिलहाल हम इस पर इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते’। भारत सरकार का यह रुख दर्शाता है कि वह ऐसे बयानों पर बहुत ज्यादा आक्रामक होने के बजाय कूटनीतिक धैर्य और शांति बनाए रखने के पक्ष में है।
अमेरिकी न्याय प्रणाली पर प्रहार
वीडियो में माइकल सैवेज का निशाना सिर्फ भारत और चीन तक ही सीमित नहीं था बल्कि उन्होंने अमेरिकी न्याय प्रणाली और ‘अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन’ (ACLU) की भी जमकर आलोचना की। सैवेज का तर्क था कि कानूनी बहसों की आड़ में अमेरिका में अवैध प्रवासियों की संख्या बढ़ रही है।
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उन्होंने सुझाव दिया कि नागरिकता जैसे गंभीर संवैधानिक मुद्दे पर अदालती फैसलों के बजाय पूरे देश में जनमत संग्रह (वोटिंग) कराया जाना चाहिए, ताकि जनता की राय स्पष्ट हो सके। फिलहाल, अमेरिकी दूतावास की सफाई के बाद इस विवाद को शांत करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इसने एक बार फिर अमेरिका में नागरिकता कानूनों और विदेशी संबंधों पर नई बहस छेड़ दी है।
