अमेरिका ने 36 साल बाद दोहराया नोरिएगा कांड, मादुरो से पहले इस तानाशाह को किया था गिरफ्तार
Maduro Venezuela News: मादुरो की गिरफ्तारी ने दुनिया को चौंका दिया है। यह पहली बार नहीं है जब US ने किसी सत्ता में बैठे विदेशी शासक को सैन्य कार्रवाई के जरिए पकड़ने का दावा किया हो।
- Written By: अमन उपाध्याय
36 साल बाद अमेरिका ने फिर किया वही काम, (डिजाइन फोटो)
Who Was Manuel Noriega Panama? अमेरिका-वेनेजुएला संबंधों में शनिवार को उस वक्त बड़ा मोड़ आ गया, जब दावा किया गया कि अमेरिकी सैनिकों ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘सोशल ट्रुथ’ पर पोस्ट कर कहा कि अमेरिका ने वेनेजुएला में एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन अंजाम दिया है और मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका लाया गया है।
हालांकि इस दावे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल भी उठ रहे हैं, लेकिन इस खबर ने एक पुरानी घटना की याद जरूर दिला दी है, जब अमेरिका ने करीब 26 साल पहले पनामा के तत्कालीन तानाशाह मैनुअल नोरिएगा को इसी तरह पकड़ लिया था।
कौन थे मैनुअल नोरिएगा?
ब्रिटानिका की रिपोर्ट के मुताबिक, 1980 के दशक में मैनुअल नोरिएगा अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA के लिए काम करते थे। वह अमेरिकी हितों के लिए सूचनाएं साझा करते थे और लंबे समय तक वॉशिंगटन के भरोसेमंद बने रहे। लेकिन समय के साथ नोरिएगा और अमेरिका के रिश्ते बिगड़ते चले गए।
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कैसे बने अमेरिका के दुश्मन?
1980 के दशक के आखिर में नोरिएगा पर ड्रग कार्टेल्स से संबंध रखने कोकीन की तस्करी और अमेरिका विरोधी राजनीति करने के गंभीर आरोप लगे। अमेरिका ने उन्हें ड्रग ट्रैफिकिंग का दोषी करार दिया लेकिन चुनौती यह थी कि नोरिएगा उस वक्त पनामा के वास्तविक शासक थे।
ऑपरेशन जस्ट कॉज क्या था?
दिसंबर 1989 में अमेरिका ने ‘ऑपरेशन जस्ट कॉज’ के तहत पनामा पर सीधा सैन्य हमला कर दिया। करीब 24 हजार अमेरिकी सैनिकों ने देश में घुसपैठ की। आधिकारिक तौर पर इसका मकसद लोकतंत्र बहाल करना और ड्रग माफिया के खिलाफ कार्रवाई बताया गया लेकिन असली लक्ष्य नोरिएगा को पकड़ना था।
हमले के बाद कहां छिपा तानाशाह?
हमले के बाद नोरिएगा वेटिकन के दूतावास में जा छिपे। अंतरराष्ट्रीय कानून के चलते अमेरिकी सैनिक सीधे अंदर घुस नहीं सकते थे। ऐसे में अमेरिका ने मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति अपनाई।
कैसे किया गया गिरफ्तार?
दूतावास के बाहर बड़े लाउडस्पीकर लगाकर लगातार तेज रॉक म्यूजिक बजाया गया ताकि नोरिएगा मानसिक दबाव में आ जाएं। करीब 10 दिन तक चले इस अनोखे अभियान के बाद 3 जनवरी 1990 को नोरिएगा ने आत्मसमर्पण कर दिया।
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इसके बाद उन्हें हथकड़ी लगाकर अमेरिका ले जाया गया जहां अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए 40 साल की सजा सुनाई। आज जब मादुरो की गिरफ्तारी के दावे सामने आए हैं तो नोरिएगा की यह कहानी फिर से दुनिया के सामने आ गई है, जो बताती है कि अमेरिका अतीत में सत्ता में बैठे नेताओं के खिलाफ किस हद तक जा चुका है।
