राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Trump Iran War NATO Conflict: दुनिया के सबसे शक्तिशाली सैन्य संगठन ‘नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन’ (NATO) के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देते हुए संकेत दिया है कि ईरान के साथ चल रहे युद्ध के समाप्त होने के बाद अमेरिका खुद को नाटो से अलग कर सकता है। बुधवार, 1 अप्रैल को एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने नाटो की प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल उठाए और इसे एक ‘कागजी शेर’ करार दिया।
डेली टेलीग्राफ से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वे नाटो को छोड़ने के विकल्प पर पूरी गंभीरता से समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे नाटो कभी पसंद नहीं था और अब मैं इसे छोड़ने पर विचार कर रहा हूं। इस पर बहुत अधिक सोचने की जरूरत नहीं है बस ईरान जंग खत्म होने का इंतजार है जिसके बाद मैं अपना फैसला सुना दूंगा। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी नाटो और अमेरिका के संबंधों की समीक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया था जिससे ट्रंप के इस कदम को प्रशासनिक समर्थन मिलता दिख रहा है।
ट्रंप की इस नाराजगी के पीछे यूरोप के सहयोगी देशों का रवैया मुख्य कारण बताया जा रहा है। राष्ट्रपति ने शिकायत की कि जब यूक्रेन में युद्ध शुरू हुआ तो वह अमेरिका का युद्ध नहीं था बल्कि पूरी तरह से यूरोप का संकट था फिर भी अमेरिका ने यूक्रेन का भरपूर सहयोग किया। ट्रंप के अनुसार कि हम वहां चट्टान की तरह खड़े रहे लेकिन जब हमारी बारी आई और ईरान के साथ संघर्ष शुरू हुआ तो सभी सहयोगी देश किनारे हो गए। उन्होंने हमें युद्ध के मैदान में पूरी तरह अकेले छोड़ दिया है।
इस बीच, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी सख्त लहजा अपनाते हुए इसे अमेरिका का निजी मामला करार दिया है। स्टार्मर ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान के साथ जारी संघर्ष ‘हमारा युद्ध नहीं है और वे अपनी जनता को किसी ऐसे विवाद में नहीं झोंकेंगे जिससे उनका कोई लेना-देना न हो। ब्रिटेन के अलावा फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे प्रमुख नाटो सदस्यों ने भी इस युद्ध को ‘इजरायल का युद्ध’ बताते हुए खुद को सैन्य सहयोग से अलग कर लिया है।
ट्रंप ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि ब्रिटेन के पास अब प्रभावी नौसेना भी नहीं बची है और उनकी तकनीक पुरानी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि कीर स्टार्मर केवल ऊर्जा बचाने की कोशिशों में लगे हैं जिससे कुछ हासिल नहीं होने वाला।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका नाटो से अलग होता है तो यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे के लिए सबसे बड़ा बदलाव होगा। रूस के राष्ट्रपति पुतिन भी इस संगठन की वर्तमान स्थिति और आंतरिक मतभेदों से वाकिफ हैं, जिस पर ट्रंप ने कहा कि रूस भी अब नाटो को गंभीरता से नहीं लेता है। अब पूरी दुनिया की नजरें ईरान युद्ध के अंत पर टिकी हैं क्योंकि वही पल तय करेगा कि दशकों पुराना यह रक्षा गठबंधन बना रहेगा या बिखर जाएगा।