अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप। इमेज-सोशल मीडिया
Donald Trump Latest News: अमेरिका को रिजीम चेंज शब्द में खूब दिलचस्पी है। इसके लिए सरकार बनाना और बिगाड़ना बाएं हाथ का खेल है। दो साल पहले बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट हुआ। 2024 में ही सीरिया में बशर अल असद को सत्ता से हटाया गया। दोनों जगह अंतरिम सरकारें देश चला रही हैं। इन अंतरिम सरकारों के नेताओं की अमेरिका से नजदीकियां पूरी दुनिया जानती है।
2021 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अमेरिका को Absolutely Not कहा था। उसके बाद इमरान के साथ क्या हुआ, सभी को पता है। इमरान और असीम मुनीर एक-दूसरे के दुश्मन हैं। वही मुनीर डोनाल्ड ट्रंप के करीबी हैं। दरअसल, इमरान खान से अमेरिका एक एयरबेस मांग रहा था, जिससे यहां से अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ ऑपरेशन किया जा सके। इमरान ने अमेरिका को साफ मना कर दिया। उन्होंने एक इंटरव्यू में खुद इसका खुलासा किया है। अमेरिका को यही बात बुरी लग गई।
सीरिया के अपदस्थ राष्ट्रपति बशर अल असद ईरान और रूस के करीबी माने जाते थे। 2024 में विद्रोह भड़कने के बाद असद को रूस जाना पड़ा। अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद अहमद हुसैन अल-शरा को सीरिया का नया नेता बनाया गया। उसकी पुरानी पहचान अबू मोहम्मद अल-जुलानी को मिटा दिया गया। अमेरिका ने जुलानी का नाम आतंक की सूची में डाल रखा था। उस पर लाखों का इनाम था। मगर, सत्ता संभालते ही सब कुछ हटाया गया। आज सीरिया में अल-शरा अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा।
प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दावा किया था कि अमेरिका उसके सेंट मार्टिन द्वीप पर सैन्य अड्डा बनाना चाहता है। एक अधिकारी ने प्रस्ताव रखा था कि द्वीप दीजिए और सत्ता पर बने रहिए। मगर, हसीना नहीं राजी हुईं। उनके दावे के कुछ दिन बाद पूरे बांग्लादेश में हिंसा और अराजकता फैली। 5 अगस्त 2024 को हसीना को अपना पद और देश छोड़ना पड़ गया। वैसे, अमेरिकी विदेश विभाग ने शेख हसीना के दावों का खंडन किया था। बाद में यह भी खुलासा हुआ कि यूएसएड के तहत बांग्लादेश में भारी रकम भेजी गई थी।
किसी भी देश में अमेरिका अचानक सरकार नहीं गिराता है। यह प्लानिंग के तहत किया जाता है। कई बार इसके पीछे वर्षों की मेहनत होती है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो 2013 से अमेरिका के रडार पर थे। अमेरिका ने उन्हें तानाशाही, वोट चोरी, चुनाव में धांधली, गैर-कानूनी सरकार और बाद में ड्रग्स तस्करी के आरोप में घेरा। अमेरिका के प्रभाव वाले कई देश भी मादुरो को तानाशाह मानने लगे। वेनेजुएला की चुनाव प्रक्रिया पर वर्षों तक सवाल उठाया गया। वहां का विपक्ष भी अमेरिका के साथ आ गया। उसने भी मादुरो सरकार पर वोट चोरी का आरोप लगाया। मादुरो ने विपक्ष पर एक्शन लिया तो तानाशाह कहा गया। इन आरोपों के जिक्र से दुनिया में नैरेटिव बना की मादुरो तानाशाह और चुनाव धांधली से जीतते हैं। अमेरिका ने 2024 में भी मादुरो की जीत को धांधली बता खारिज कर दिया और चुनाव आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाया। अमेरिका ने मादुरो की जगह विपक्ष की नेता एडमंडो गोंजालेज को असली राष्ट्रपति माना।
अमेरिका मीडिया और नैरेटिव की जंग लड़ता है। दुनिया भर की मीडिया के जरिए सरकारों को तानाशाह, चुनावी धांधली से जीत और भ्रष्ट दिखाता है। लोकतंत्र के नाम पर आंदोलन भड़काना, इन आंदोलनों को मीडिया से समर्थन दिलाना। गैर-सरकारी संगठनों और विपक्षी दलों की फंडिंग करना, जिससे मौजूदा सरकार के खिलाफ जमीनी स्तर पर माहौल बनााए जा सके। चुनावी हस्तक्षेप, सियासी दल और सोशल मीडिया के जरिये जनमत को प्रभावित करना। अमेरिका सबसे अधिक यूएसएड के माध्यम से दखल देता है। आर्थिक प्रतिबंध लगाकर देश को कमजोर करना। अंतराष्ट्रीय संगठनों के जरिये दबाव डालवाना। व्यापार और बैंकिंग पर रोक देन। अमेरिका क्यूबा, वेनेजएला और ईरान के साथ यह कर चुका है।
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इन सबसे बात नहीं बनने की स्थिति में अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप करता है। 2003 में परमाणु बम बनाने की फर्जी रिपोर्ट के आधार पर इराक पर हमला बोला और बाद में वहां के शासक सद्दाम हुसैन को फांसी पर चढ़ा दिया। 2011 में लीबिया में मुअम्मर गद्दाफी को इन्हीं आरोपों के तहत मारा था।