तारिक रहमान और मुहम्मद यूनुस, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Bangladesh July Charter Controversy: बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। खालिदा जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान ने आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री पद की शपथ तो ले ली है। इसके साथ ही देश में करीब 36 साल बाद किसी पुरुष प्रधानमंत्री का शासन शुरू हुआ है।
हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की है कि क्या इस पूरी बिसात के असली विजेता तारिक रहमान हैं या नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस है जिन्होंने पिछले 18 महीनों तक अंतरिम प्रशासन की कमान संभाली।
जुलाई-अगस्त 2024 में छात्रों के एंटी-कोटा आंदोलन के बाद जब शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा, तब मोहम्मद यूनुस अंतरिम प्रशासन के मुखिया बने थे। उन्होंने 18 महीनों के अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसले लिए।
यूनुस की सबसे बड़ी सफलता यह मानी जा रही है कि उन्होंने शेख हसीना की पार्टी, अवामी लीग को बाहर रखकर चुनाव कराए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेषकर पश्चिमी देशों से इसे ‘समावेशी’ चुनाव की मान्यता भी दिला दी। वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि 40% वोट शेयर वाली पार्टी को बाहर रखकर चुनाव कराना और उसे स्वीकार्य बनाना यूनुस की बड़ी कूटनीतिक जीत है।
यूनुस के कार्यकाल में अमेरिका के साथ एक महत्वपूर्ण ट्रेड डील साइन की गई। इस समझौते के तहत अमेरिकी कच्चे माल से बने बांग्लादेशी उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ को शून्य कर दिया गया जिसे बांग्लादेशी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने डेटा प्राइवेसी और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे आधुनिक विषयों पर अध्यादेशों के जरिए कानून भी बनाए।
सफलता के दावों के बीच, यूनुस का कार्यकाल विवादों से भी घिरा रहा। उनके शासन के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे। अल्पसंख्यकों पर हमले, भीड़ द्वारा हिंसा और राजनीतिक हत्याएं बदस्तूर जारी रहीं। साथ ही, उन पर इस्लामी संगठनों के दबाव में महिलाओं के अधिकारों से समझौता करने के आरोप भी लगे।
अब जब तारिक रहमान सत्ता में आ चुके हैं, तो यूनुस का ड्रीम प्रोजेक्ट ‘जुलाई चार्टर‘ खतरे में नजर आ रहा है।, इस चार्टर को जनमत संग्रह में 62% लोगों का समर्थन मिला था जिसका उद्देश्य संसद को 180 दिनों के लिए संविधान सभा की तरह काम करने की शक्ति देना था। लेकिन, दो-तिहाई बहुमत हासिल करने वाली BNP इस चार्टर की कई धाराओं का विरोध कर रही है। जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजंस पार्टी (NCP) ने धमकी दी है कि अगर चार्टर लागू नहीं हुआ तो वे सड़कों पर उतरेंगे।
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प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि 85 वर्षीय यूनुस क्या करेंगे। हालांकि कुछ लोग उनके राष्ट्रपति बनने की अटकलें लगा रहे थे लेकिन BNP सरकार में इसकी संभावना कम ही दिखती है। फिलहाल, ढाका की सत्ता से दूर होते हुए भी बांग्लादेश की नई व्यवस्था पर मोहम्मद यूनुस की गहरी छाप नजर आती है।