आग से खेल रहे हैं तारिक रहमान! आर्मी चीफ के दुश्मन को सौंपी विदेश मंत्रालय की कमान, बढ़ सकती है तकरार
Bangladesh Politics: बांग्लादेश में प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नई कैबिनेट में डॉक्टर खलीलुर्रहमान विदेश मंत्री बने, जिससे सेना प्रमुख वकार उज जमां के साथ पुरानी तनातनी फिर सामने आई।
- Written By: अक्षय साहू
वकार उज जमां, खलीलुर्रहमान (सोर्स- सोशल मीडिया)
Bangladesh Army Chief Khalilur Rehman Tension: बांग्लादेश में मंगलवार को नई सरकार का गठन हो गया, जिसमें प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने कई नए चेहरों को अपनी कैबिनेट में शामिल किया। इसमें सबसे चर्चा में रहे डॉक्टर खलीलुर्रहमान का है, जिन्हें यूनुस सरकार के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) के रूप में जाना जाता था और अब बीएनपी सरकार में विदेश मंत्री बनाया गया है।
अमेरिका समर्थक खलीलुर्रहमान की नियुक्ति न केवल ढाका की विदेश नीति में बदलाव का संकेत नहीं देती है, बल्कि देश की आंतरिक राजनीति में भी हलचल पैदा कर सकती है। इसके पीछे उनकी आर्मी चीफ वकार-उज-जमां के साथ पुरानी तनातनी भी एक बड़ा कारण है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मोहम्मद यूनुस के अंतरिम शासन में खलीलुर्रहमान काफी प्रभावशाली रहे और उन्हें अमेरिका का ‘प्रतिनिधि’ माना जाता रहा। NSA के रूप में कई बार विवादों में रहने वाले खलील अब नई सरकार में सबसे महत्वपूर्ण पदों में से एक पर आसीन हुए हैं।
‘डील’ का हिस्सा हो सकती है नियुक्ति
तारिक रहमान की कैबिनेट में खलीलुर्रहमान का विदेश मंत्री बनना अचानक हुआ और इसे किसी ‘संदिग्ध डील’ से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिका-बांग्लादेश ट्रेड डील और बोइंग एयरक्राफ्ट खरीद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले खलील को सांसद न होने के बावजूद ‘टेक्नोक्रेट’ कोटे से मंत्री पद दिया गया।
सम्बंधित ख़बरें
नेतन्याहू वही करेंगे जो मैं चाहूंगा…ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- समझौते कोई जल्दी नहीं
US Navy ने ओमान की खाड़ी में ईरानी तेल टैंकर को रोका, बदलवाया रास्ता, होर्मुज में तनाव और गहराया
India Italy Relations: ‘मेलोडी’ रील से इतर समझें हकीकत, आखिर भारत के लिए क्यों गेमचेंजर साबित होगा इटली?
आज की ताजा खबर 21 मई LIVE: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज मंत्रिपरिषद के साथ करेंगे बैठक
इस नियुक्ति से ढाका की राजनीतिक गलियारों और बीएनपी में कई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि खलीलुर्रहमान का विदेश मंत्री बनना न केवल हैरत का विषय है, बल्कि यह आर्मी चीफ वकार उज जमां के साथ नई तनातनी की संभावना को भी उजागर करता है।
क्या है खलील-वकार का विवाद?
मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में खलीलुर्रहमान और वकार जमां के बीच कई मुद्दों पर खींचतान रही। दोनों अक्सर एक-दूसरे को कमजोर करने की कोशिश करते दिखे। इस विवाद की शुरुआत मई 2025 में हुई, जब खलील ने म्यांमार के लिए रखाइन ह्यूमैनिटेरियन कॉरिडोर बनाने की पहल की। खलीलुर्रहमान इस कॉरिडोर के पक्ष में थे, जबकि जनरल जमां ने इसे ‘खूनी कॉरिडोर’ कहकर विरोध जताया। खलील के अमेरिकी समर्थित रुख के कारण विवाद और गहरा गया।
ढाका कैंटोनमेंट में खलील की एंट्री पर बैन
खलील और जमां के तनाव को दर्शाता है कि ढाका कैंटोनमेंट में खलीलुर्रहमान की एंट्री पर बैन लगाया गया है। खलील ने लेफ्टिनेंट जनरल कमरुल हसन को चीफ ऑफ जनरल स्टाफ बनाने की कोशिश की, जिससे जमां को कमजोर करने की योजना थी। हालांकि, जमां ने इस प्रयास को नाकाम किया और खलील के समर्थक अफसरों को आगे नहीं बढ़ने दिया। इस तनातनी के कारण 31 जनवरी 2026 से CGS का पद खाली है।
यह भी पढ़ें: श्रीलंका में सांसदों की पेंशन बंद: पूर्व राष्ट्रपतियों की सुख-सुविधाओं में भी सरकार ने की भारी कटौती
नियुक्ति से बढ़ेगी जमां की टेंशन
विदेश मंत्री जैसे प्रभावशाली पद पर खलीलुर्रहमान की नियुक्ति से स्पष्ट है कि वे जनरल जमां के लिए चुनौती बने रहेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि खलील सीधे तौर पर सेना के कामकाज को प्रभावित नहीं कर पाएंगे, लेकिन जमां के लिए वे एक कांटे की तरह रहेंगे। जून 2027 में जमां के रिटायर होने तक, वे आर्मी में अपने वफादार अफसरों को मजबूत करने का प्रयास करेंगे ताकि खलीलुर्रहमान के किसी नए खतरे का सामना किया जा सके।
Frequently Asked Questions
-
Que: तारिक रहमान ने खलीलुर्रहमान को विदेश मंत्री क्यों नियुक्त किया है?
Ans: खलीलुर्रहमान को टेक्नोक्रेट कोटे से विदेश मंत्री बनाया गया। उन्हें अमेरिका समर्थक माना जाता है और अमेरिका-बांग्लादेश ट्रेड डील एवं बोइंग एयरक्राफ्ट सौदों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के कारण उनकी नियुक्ति को नई सरकार में अमेरिकी प्रभाव बनाए रखने वाला कदम माना जा रहा है।
-
Que: खलीलुर्रहमान और आर्मी चीफ जमां के बीच तनातनी क्यों है?
Ans: तनातनी की शुरुआत मई 2025 में खलील के म्यांमार में रखाइन ह्यूमैनिटेरियन कॉरिडोर के प्रयासों पर जमां के विरोध से हुई। खलील अमेरिकी समर्थित रुख अपनाते रहे, जबकि जमां ने इसे ‘खूनी कॉरिडोर’ कहते हुए विरोध किया। दोनों के बीच लगातार खींचतान रही।
-
Que: खलील की नियुक्ति से बांग्लादेश की सेना पर क्या असर होगा?
Ans: विदेश मंत्री पद पर खलील सीधे सेना के कामकाज को नियंत्रित नहीं कर सकते, लेकिन वे आर्मी चीफ जमां के लिए चुनौती बने रहेंगे। जून 2027 तक जमां अपने वफादार अफसरों को मजबूत करेंगे ताकि खलीलुर्रहमान के किसी नए खतरे का सामना किया जा सके।
