तालिबान के नए कानून (सोर्स-सोशल मीडिया)
Taliban Strict Social Classification Laws: तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने 4 जनवरी 2026 को अफगानिस्तान में एक नया और कठोर आपराधिक प्रक्रिया कोड आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। इस नए कानून के तहत समाज को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिसमें धर्मगुरुओं और रसूखदारों को विशेष रियायतें दी गई हैं। तालिबान के सख्त सामाजिक वर्गीकरण कानून के तहत अब न्याय प्रणाली पूरी तरह से व्यक्ति की सामाजिक स्थिति और वर्ग पर आधारित होगी। यह बदलाव मानवाधिकारों और विशेष रूप से महिलाओं की स्वतंत्रता पर कई तरह के गंभीर और चौंकाने वाले प्रतिबंध लगाता है।
नए कोड के आर्टिकल 9 के मुताबिक अगर कोई इस्लामी विद्वान या उलेमा अपराध करता है, तो उसे केवल सुधारात्मक सलाह देकर छोड़ दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर मध्यम वर्ग के अपराधियों के लिए जेल का प्रावधान किया गया है, जबकि समाज के निचले वर्ग के लिए जेल के साथ कोड़े मारना अनिवार्य है। समाज के एलीट यानी रसूखदार वर्ग के लोगों को केवल कोर्ट में बुलाकर सलाह दी जाएगी, जो न्याय प्रणाली में गहरे भेदभाव को साफ तौर पर दर्शाता है।
तालिबान के नैतिकता मंत्रालय ने ‘सदा-ए-औरत’ यानी महिलाओं की आवाज को लेकर नए सख्त नियम जारी किए हैं, जिसके तहत वे सार्वजनिक स्थानों पर जोर से नहीं बोल सकतीं। यहां तक कि महिलाओं को अपने घर के बाहर प्रार्थना करने या कुरान का पाठ इस तरह करने की मनाही है कि उनकी आवाज दूसरों तक पहुंचे। अस्पतालों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसी किसी भी महिला का इलाज न करें जिसके साथ उसका कोई पुरुष रिश्तेदार यानी महरम मौजूद न हो।
अफगानिस्तान के कई प्रांतों में अब घरों की खिड़कियों को काले रंग से पेंट करने या उन्हें मोटे पर्दों से पूरी तरह ढकने का कठोर आदेश जारी किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घर के भीतर मौजूद महिलाएं बाहर से किसी भी अजनबी व्यक्ति को बिल्कुल भी दिखाई न दें। इसके अलावा मीडिया और विज्ञापनों में इंसानों और जानवरों जैसे जीवित प्राणियों की तस्वीरें या वीडियो दिखाने पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
तालिबान का यह नया कोड न केवल महिलाओं बल्कि पुरुषों के रहन-सहन और उनकी जीवनशैली पर भी कई तरह के कड़े नियंत्रण लागू करने का काम करता है। पुरुषों के लिए पश्चिमी शैली के हेयरकट रखने और दाढ़ी कटवाने पर अब पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है, जिसका उल्लंघन करने पर कड़ी सजा दी जाएगी। जो भी पुरुष इन नियमों की अनदेखी करेगा, उसे भारी जुर्माने के साथ-साथ जेल की सजा का भी सामना करना पड़ सकता है, जो अब अनिवार्य है।
महिलाओं के लिए अब सभी सार्वजनिक पार्कों, जिमों, मनोरंजन केंद्रों और सार्वजनिक स्नानागारों में प्रवेश करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके साथ ही सार्वजनिक वाहनों और किसी भी तरह के सामाजिक समारोहों में संगीत बजाना अब एक गंभीर दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा गया है। तालिबान के इन अजीबोगरीब फरमानों ने अफगान नागरिकों के सार्वजनिक और निजी जीवन को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है, जिससे वहां गहरा डर है।
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इन नए नियमों के लागू होने के बाद अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंताएं और अधिक व्यापक रूप से बढ़ गई हैं। समाज का यह विभाजन और भेदभावपूर्ण सजा प्रणाली न्याय के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है, जो केवल एक खास वर्ग को सुरक्षा प्रदान करती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इन बदलावों के दूरगामी परिणामों और अफगान जनता पर पड़ने वाले इसके नकारात्मक प्रभावों को लेकर काफी सतर्क और चिंतित बना हुआ है।