तालिबान ने पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर किया हमला (सोर्स- सोशल मीडिया)
Noor Khan Airbase Attack: ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत पर दिखावे के आंसू बहाने वाली पाकिस्तानी सरकार का असली और क्रूर चेहरा अब दुनिया के सामने पूरी तरह बेनकाब हो गया है। जहां एक तरफ सीमा पर तालिबान ने रावलपिंडी के नूर खान मिलिट्री बेस सहित कई अहम ठिकानों पर भीषण एयरस्ट्राइक कर भारी तबाही मचाई है। वहीं दूसरी ओर अपनी सीमा की सुरक्षा करने में नाकाम प्रशासन कराची की सड़कों पर हक मांग रहे अपने ही बेगुनाह नागरिकों पर गोलियां बरसा रहा है। देश के भीतर गृहयुद्ध जैसे हालात और सरहद पर दुश्मन के हमलों ने पाकिस्तान को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है जहां जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है।
अफगान तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक दावा किया है कि उन्होंने पाकिस्तान की हालिया एयरस्ट्राइक के जवाब में रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस पर हमला किया है। इस सैन्य कार्रवाई में क्वेटा स्थित 12वीं कोर और अन्य कई महत्वपूर्ण पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है जिससे वहां भारी नुकसान की खबर है। तालिबान के अनुसार यह जवाबी हमला इसलिए जरूरी था क्योंकि पाकिस्तानी सेना ने पहले काबुल और बगराम जैसे उनके सुरक्षित ठिकानों को निशाना बनाने की हिमाकत की थी।
एक तरफ सीमा पर पाकिस्तानी सेना लाचार नजर आ रही है तो दूसरी तरफ कराची में अपने ही निहत्थे लोगों पर सरकारी बंदूकों का कहर सरेआम टूट पड़ा है। ईरान के नेता की मौत पर सहानुभूति जताने का नाटक करने वाली सरकार वहां विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए हिंसक रास्ते और सीधी गोलियों का सहारा ले रही है। अपनों पर गोलियां चलाकर ये हुक्मरान शायद यह भूल गए हैं कि विदेशी सहानुभूति बटोरने से पहले उन्हें अपने घर के मासूम नागरिकों की जान की फिक्र करनी चाहिए थी।
तालिबान का कहना है कि उनकी वायुसेना ने खैबर पख्तूनख्वा के मोहम्मद एजेंसी और घलानी सैन्य अड्डों पर भी बेहद सटीक और सफल हवाई हमले अंजाम दिए हैं। इन हमलों के कारण रावलपिंडी जैसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में भी सेना के कमांड सेंटरों को भारी क्षति पहुंचने की जानकारी सामने आ रही है। तालिबान ने अब स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनके हवाई क्षेत्र का दोबारा उल्लंघन हुआ तो वे भविष्य में और भी अधिक घातक और कड़ा जवाबी एक्शन लेंगे।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख जहां अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को महान साबित करने में लगे हैं, वहीं देश की जमीनी हकीकत आज बेहद दर्दनाक और डरावनी है। कराची से लेकर खैबर तक की जनता अब सरकार की इस दोहरी नीति के खिलाफ सड़कों पर उतर आई है और प्रशासन के खिलाफ अपना जबरदस्त गुस्सा जाहिर कर रही है। सीमा पर सुरक्षा में बड़ी सेंध और देश के भीतर अपनों पर ही हो रहे इन अत्याचारों ने यह साबित कर दिया है कि सत्ता को जनता से अधिक अपनी कुर्सी प्यारी है।
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अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में हुए धमाकों और पाकिस्तानी जेट विमानों की घुसपैठ ने पूरे दक्षिण एशिया में एक बहुत बड़े युद्ध की आशंका पैदा कर दी है। फिलहाल तालिबान के इन दावों पर पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है लेकिन पूरे इलाके में सुरक्षा को लेकर भारी तनाव बना हुआ है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में पाकिस्तान अपनी जनता को बचाने और अपनी सीमाओं की रक्षा करने के लिए क्या कोई ठोस और प्रभावी कदम उठाता है।