शी जिनपिंग और चो जुंग-ताई, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
China Taiwan Conflict: ताइवान के प्रधानमंत्री चो जुंग-ताई की हालिया जापान यात्रा ने पूर्वी एशिया के कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। 1972 में टोक्यो और ताइपे के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध टूटने के बाद यह 52 वर्षों में पहली बार है जब ताइवान के किसी मौजूदा प्रधानमंत्री ने जापान की धरती पर कदम रखा है। इस ऐतिहासिक दौरे से चीन बुरी तरह बौखला गया है।
ताइवान सरकार ने इस दौरे को पूरी तरह ‘निजी’ बताया है। जानकारी के अनुसार, चो जुंग-ताई वर्ल्ड बेसबॉल क्लासिक में ताइवान की राष्ट्रीय टीम का समर्थन करने के लिए सप्ताह के अंत में जापान पहुंचे थे। जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने भी स्पष्ट किया कि इस दौरान जापानी सरकारी अधिकारियों और ताइवानी प्रधानमंत्री के बीच कोई आधिकारिक बैठक या संपर्क नहीं हुआ है। जापान ने इस यात्रा के राजनीतिक महत्व को कम दिखाने की कोशिश करते हुए इसे पूरी तरह गैर-सरकारी बताया है।
चीन ने इस यात्रा पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे ‘नापाक मंशा’ वाली यात्रा करार दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने आरोप लगाया कि चो ‘चुपके और गुप्त तरीके से’ ताइवान की स्वतंत्रता को बढ़ावा दे रहे हैं। बीजिंग का मानना है कि ताइवान की ऐसी कोई भी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी उसकी अलग राजनीतिक पहचान को वैध बनाने की कोशिश है, जो ‘एक चीन’ (One China) सिद्धांत को कमजोर करती है। चीन ने जापान को चेतावनी देते हुए कहा है कि उसे इस तरह के ‘उकसावे’ को बर्दाश्त करने की कीमत चुकानी पड़ सकती है।
ताइवान ने चीन की आलोचना को सिरे से खारिज कर दिया है। ताइपे का कहना है कि उसके नेताओं को बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के अन्य देशों की यात्रा करने का अधिकार है और ताइवान का भविष्य वहां की लोकतांत्रिक जनता तय करेगी।
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गौरतलब है कि जापान ने 1895 से 1945 तक ताइवान पर शासन किया था। हालांकि 1972 के बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं, लेकिन उनके बीच मजबूत आर्थिक, सांस्कृतिक और अनौपचारिक राजनीतिक रिश्ते बने हुए हैं। इससे पहले 2022 में मौजूदा राष्ट्रपति लाई चिंग-ते (तत्कालीन उपराष्ट्रपति) भी शिंजो आबे को श्रद्धांजलि देने जापान गए थे।