साइक्लोन दित्वा का कहर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Sri Lanka Cyclone: साइक्लोन दित्वा ने श्रीलंका में ऐसी बारिश कराई है जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश ने देश के निचले इलाकों को पानी में डुबो दिया है, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मिट्टी ढीली होने से कई जगह भूस्खलन शुरू हो गए। यह प्राकृतिक आपदा धीरे-धीरे एक बड़े मानवीय संकट का रूप ले चुकी है। श्रीलंका सरकार ने हालात को देखते हुए आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी है।
सबसे दुखद पहलू यह है कि इस भीषण आपदा में अब तक 120 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 50 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। लगभग 1.5 लाख लोग सीधे प्रभावित हुए हैं और इसके साथ ही 195 राहत शिविरों में करीब 14,000 लोग रहने को मजबूर हैं। स्थानीय प्रशासन के अनुसार मृतकों की संख्या अभी बढ़ सकती है, क्योंकि कई गांवों में अब भी बचाव टीमें नहीं पहुंच पाई हैं।
मातले क्षेत्र में तो सिर्फ 24 घंटे में 540 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य सीमा से कई गुना अधिक है। पिछले 10 दिनों में लगभग 1000 मिमी बारिश ने पूरे इलाके को तबाह कर दिया। वैज्ञानिकों के मुताबिक, 150 मिमी बारिश भी लैंडस्लाइड की आशंका बढ़ा देती है, जबकि श्रीलंका के कई हिस्सों में यह आंकड़ा 500 मिमी से भी अधिक पहुंच चुका है।
सबसे गंभीर स्थिति कोलंबो और गंपाहा में है, जहां केलानी और अट्टानगालु नदियां खतरे के स्तर से ऊपर बह रही हैं। सरकार ने लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने, जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखने और अलर्ट पालन करने के निर्देश दिए हैं।
तूफान ने देश के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। तीन बड़े पुल मोरगहकंडा मेन ब्रिज, एलाहेरा ब्रिज और कुमारा एला ब्रिज तेज बहाव में पूरी तरह टूटकर बह गए। बिजली की लाइनों को भारी क्षति पहुंचने से 25-30% इलाके में बिजली गुल है। कई ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं और शिक्षा विभाग ने परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं।
स्थिति की गंभीरता देखते हुए राष्ट्रपति ने आपातकालीन कानून लागू कर दिया और बिजली, फ्यूल, अस्पताल और पानी को “आवश्यक सेवाएं” घोषित किया। कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम को राहत केंद्र में बदल दिया गया है, जहां करीब 3,000 लोगों को ठहराया जा सकता है।
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इस संकट में भारत ने भी तुरंत मानवीय मदद का हाथ बढ़ाया है। ऑपरेशन सागर बंधु के तहत भारतीय नौसेना के INS विक्रांत और INS उदयगिरि श्रीलंका पहुंचे हैं। दोनों जहाजों पर 4.5 टन सूखा राशन, 2 टन ताजा भोजन, दवाइयां और अन्य अत्यावश्यक राहत सामग्री भेजी गई है।