
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक-योल, फोटो ( सो. सोशल मीडिया )
नवभारत इंटरनेशनल डेस्क: दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक येओल को अदालत से बड़ी राहत मिली है, क्योंकि कोर्ट ने उनकी जेल से रिहाई के अनुरोध को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब उनके जेल से बाहर आने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। गौरतलब है कि लगभग एक महीने पहले उन्हें सैन्य शासन लागू करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और उनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की गई थी।
दक्षिण कोरिया के अभियोजकों ने यून सुक पर सैन्य शासन लागू करने के प्रयास के आरोप में विद्रोह का मामला दर्ज कराया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सियोल मध्य जिला अभियोजन कार्यालय ने तीन दिसंबर को जारी किए गए एक आदेश के सिलसिले में यून के खिलाफ यह कार्रवाई की है। इस आदेश के चलते देश में गंभीर राजनीतिक संकट पैदा हो गया था।
कंजरवेटिव नेता यून को सैन्य शासन लागू करने का आदेश देने के आरोप में महाभियोग के जरिए राष्ट्रपति पद से हटाए जाने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। अब संवैधानिक अदालत यह फैसला करेगी कि यून को आधिकारिक रूप से पद से बर्खास्त किया जाए या फिर बहाल किया जाए। यून ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सख्ती से खारिज किया है। उन्होंने नेशनल असेंबली को “गुंडों का अड्डा” कहा था और “उत्तर कोरिया के समर्थकों और राष्ट्रविरोधी ताकतों” को खत्म करने का संकल्प जताया था।
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जांचकर्ताओं का कहना है कि मार्शल-लॉ लगाने का आदेश विद्रोह के समान है, और अगर यून को इस अपराध का दोषी पाया जाता है, तो उन्हें मौत की सजा या उम्रकैद हो सकती है।
यून द्वारा नेशनल असेंबली में सैनिकों को भेजने का फैसला कई दक्षिण कोरियाई लोगों को पूर्व सैन्य शासन की दर्दनाक यादों की ओर ले गया। हालांकि, यह आदेश केवल छह घंटे तक ही लागू रहा, क्योंकि पर्याप्त संख्या में सांसद असेंबली हॉल में पहुंचकर सर्वसम्मति से इसे रद्द करने के पक्ष में मतदान करने में सफल रहे। बाद में, यून ने सफाई दी कि उनका आदेश केवल जनता को मुख्य उदार विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के खतरे के प्रति आगाह करने के इरादे से था, जिसने उनके एजेंडे को कमजोर किया और शीर्ष अधिकारियों पर महाभियोग चलाया।






