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Saudi Arab Provoke America: ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत ने इस्लामिक देशों को सकते में डाल दिया है, ऐसा माना जाता है कि जब तक अयातुल्ला अली खामेनेई जिंदा थे। तब तक उन्होंने इस्लामिक देशों की एकता के मुद्दे को तेजी से उठाया लेकिन उनकी मौत के बाद एक ऐसी खबर आ रही है जो सऊदी को ईरान के खिलाफ साजिशकर्ता के तौर पर दिखा रही है।
वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया है कि सऊदी अरब के प्रधानमंत्री क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने डोलाल्ड ट्रंप को कई बार फोन किया था और अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान पर हमला करने का फैसला तब लिया जब मोहम्मद बिन सलमान ने उनसे बार-बार ईरान पर हमला करने के लिए लॉबिंग की थी।
वॉशिंगटन पोस्ट ने मामले से परिचित चार लोगों का हवाला देते हुए बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने इजरायल और सऊदी अरब के हफ्तों तक चले पैरवी प्रयासों के बाद ईरान पर हमले शुरू किए। अमेरिकी खुफिया आकलन में कोई तत्काल खतरा नहीं देखा गया था, लेकिन क्षेत्रीय सहयोगियों ने हमले की वकालत की थी।
रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने सार्वजनिक तौर पर तो ईरान के समर्थन में बयान दिए लेकिन दूसरी तरफ उन्होंने अमेरिका को यह विश्वास दिलाया कि अगर ईरान को रोकना है, तो उसका एक ही रास्ता है और वो है सैन्य कार्रवाई। इसके अलावा रिपोर्ट तो यह भी दावा कर रही है कि प्रिंस सलमान ने अमेरिका को यह आश्वासन दिया था कि क्षेत्र में सुरक्षा के लिए सऊदी आगे आएगा और तेल की अपूर्ति को संभालने में भी मदद करेगा।
अंतर्राष्ट्रीय हलकों में चर्चा है कि क्राउन प्रिंस ने अपनी बात अमेरिका के समाने मजबूती से रखने के लिए ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर का सहारा लिया। बताया जा रहा है कि जेरेड और बिन सलमान के काफी अच्छे संबंध हैं। इसी का इस्तेमाल करते हुए सऊदी ने यह खेल रचा।
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गौरतलब है कि ईरान और सऊदी के बीच रिश्ते काफी खराब रहे हैं, हालांकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों देशों के बीच सुलह करवा दी थी। अब ईरान पर हमले के बाद यह खबर सामने आई है कि पर्दे के पीछे सऊदी इजरायल के साथ मिला हुआ है।