
सऊदी अरब ने ईरान पर हमला करने के लिए US को हरी झंडी दी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Saudi Arabia Green Signal to US Attack Iran: मिडिल ईस्ट में ईरान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच, सऊदी अरब की भूमिका अब सवालों के घेरे में है। एक तरफ क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) खुले तौर पर ईरान की संप्रभुता का सम्मान करते हुए संभावित सैन्य कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सऊदी रक्षा मंत्री और उनके भाई प्रिंस खालिद बिन सलमान (KBS) अमेरिका में बिल्कुल अलग संदेश दे रहे हैं।
एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में एक बंद कमरे की बैठक में खालिद बिन सलमान ने कहा कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला नहीं करता, तो ईरानी शासन और मजबूत होगा। यह बयान सऊदी अरब के सार्वजनिक रुख से मेल नहीं खाता, क्योंकि पिछले हफ्तों में देश लगातार यह कहता रहा कि वह ईरान के साथ तनाव नहीं चाहता।
मोहम्मद बिन सलमान ने हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत में स्पष्ट किया कि सऊदी अरब अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं होने देगा। सऊदी सरकार ने भी कहा कि वह ईरान की संप्रभुता का सम्मान करती है और कूटनीतिक समाधान चाहती है। लेकिन इसी बीच, खालिद बिन सलमान का अमेरिका में दिया गया बयान इस नीति पर सवाल खड़ा करता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, खालिद बिन सलमान ने अमेरिकी अधिकारियों और थिंक टैंक विशेषज्ञों से कहा कि अगर ट्रंप लगातार धमकी देने के बाद पीछे हटते हैं, तो इससे ईरान को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी हमले से पूरे इलाके में हालात बिगड़ सकते हैं, लेकिन अगर अमेरिका अब फैसला नहीं करता, तो ईरान इसे जीत मान सकता है। खालिद बिन सलमान अमेरिका की रणनीति को प्रभावित करने के लिए कई अहम बैठकों में शामिल हुए।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सऊदी अरब की रणनीति अब मजबूरी से जुड़ी हो सकती है। पहले सऊदी अधिकारी अमेरिका से हमले को टालने की अपील कर रहे थे, लेकिन अब जब ट्रंप प्रशासन ने खाड़ी में सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, सऊदी नेतृत्व शायद यह मान चुका है कि हमला हो सकता है। ऐसे में सऊदी सार्वजनिक रूप से शांति की बात करता है, लेकिन बंद दरवाजों के पीछे अमेरिका के कदम को समर्थन देता है।
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खाड़ी देशों के अधिकारी इस तनाव को गंभीर मानते हैं। उनका मानना है कि अगर अमेरिका हमला करता है तो क्षेत्र में अस्थिरता फैल सकती है, लेकिन अगर हमला नहीं होता, तो ईरान और मजबूत हो जाएगा। ऐसे में सऊदी अरब सतर्क है वह सीधे टकराव से बचना चाहता है, लेकिन साथ ही यह भी नहीं चाहता कि ईरान क्षेत्रीय ताकत के रूप में और मजबूत हो।






