शहबाज-मुनीर को ले डूबेगा अमेरिका-ईरान जंग, बिचौलिया बनना पड़ेगा भारी! जानें सऊदी की वजह से कैसे लगेगी लंका
US-Iran War: मध्य पूर्व युद्ध में पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें बेअसर साबित हो रही हैं। सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते और आंतरिक शिया आबादी के दबाव ने इस्लामाबाद की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
- Written By: अक्षय साहू
पाकिस्तान के लिए मुसीबत बन सकता है अमेरिका-ईरान युद्ध (सोर्स- सोशल मीडिया)
Pakistan on US-Iran War: इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती जंग में पाकिस्तान अपनी अहमियत दिखाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसका यह प्रयास काफी हद तक बेवजह साबित हो रहा है। जैसे-जैसे संघर्ष बढ़ रहा है, वैश्विक अर्थव्यवस्था और मध्य पूर्व के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर खतरा मंडरा रहा है, और ऐसे में पाकिस्तान ने खुद को वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक ‘बैक-चैनल’ के तौर पर पेश करने की कोशिश की है।
यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधे बात की। इसके बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से बात की और इस्लामाबाद को संभावित शांति वार्ता स्थल के रूप में पेश किया। पाकिस्तान ने ईरान को अमेरिकी शांति योजना भी सौंपी, जिसे तेहरान ने नकार दिया।
जंग खत्म होने के आसार कम
हालांकि, पाकिस्तान की यह सक्रियता बेवजह प्रतीत होती है, क्योंकि जंग खत्म होने के कोई आसार नहीं हैं, और ईरान पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा है। अगर जंग जारी रहती है, तो पाकिस्तान को सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभानी पड़ेंगी। ऐसे में अगर पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ खड़ा होता है, तो ईरान की प्रतिक्रिया का सामना करना मुश्किल हो सकता है, खासकर जब पाकिस्तान पहले ही अफगान तालिबान के साथ संघर्ष में उलझा हुआ है और ऊर्जा आपूर्ति में रुकावटों से जूझ रहा है।
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पाकिस्तान में बड़ी शिया आबादी
पाकिस्तान की स्थिति और भी जटिल हो सकती है क्योंकि ईरान के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी शिया मुस्लिम आबादी पाकिस्तान में ही है। 28 फरवरी को संघर्ष के शुरुआत में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में भी विरोध प्रदर्शन भड़क उठे थे। अगर जंग लंबी चलती है, तो पाकिस्तान पर इसका सीधा असर पड़ेगा, खासकर जब वह पहले से ही अफगानिस्तान और अन्य आंतरिक समस्याओं से जूझ रहा है।
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रक्षा समझौता बन सकती है मुसीबत
सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान का रक्षा समझौता है, जो इसमें एक अहम मुद्दा बन सकता है। युद्ध शुरु होने के बाद से ही ईरान लगातार सऊदी अरब पर हमले कर रहा है। जिससे देखते हुए माना जा रहा है कि वो जल्द ही जंग सक्रिय हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो पाकिस्तान को भी उसका साथ देने के लिए जंग के मैदान में उतरना पड़ेगा। जिससे पाकिस्तान में रहने वाली शिया आबादी जो पहले से ही सरकार से नाराज है वो खुलकर सड़कों पर विरोध के लिए आ सकती है। इससे बड़ी समस्या यह है कि अगर पाकिस्तान इस जंग में शामिल नहीं होता है तो वो खाड़ी में अपने एक अहम समयोगी को खो देगा।
