वेनेजुएला की मदद करेगा रूस, बढ़ते तनाव पर जताई चिंता, कहा- हम सैन्य सहयोग के लिए तैयार
US Venezuela Conflict: अमेरिकी दबाव और खतरों के बीच वेनेजुएला ने रूस से सैन्य मदद की अपील की है। मॉस्को ने कहा हम सहयोग के लिए तैयार हैं पर क्षेत्रीय तनाव नहीं बढ़ना चाहिए।
- Written By: अमन उपाध्याय
वेनेजुएला की मदद करेगा रूस, (कॉन्सेप्ट फोटो)
Russia Venezuela Defense Cooperation: एक बार फिर महाशक्तियों का टकराव तेज होता दिख रहा है। शुक्रवार को रूस ने कहा कि वह वेनेजुएला की सैन्य सहायता की अपील पर जवाब देने के लिए तैयार है। हालांकि, मॉस्को ने स्पष्ट किया कि वह क्षेत्र में तनाव को और नहीं बढ़ाना चाहता। यह बयान रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाखारोवा ने दिया।
ज़ाखारोवा ने कहा कि रूस हमेशा अपने साझेदारों के साथ रक्षा सहयोग को रचनात्मक दृष्टिकोण से देखता है। लेकिन हम क्षेत्र में किसी भी तरह के टकराव या अस्थिरता के पक्ष में नहीं हैं।
मॉस्को से सैन्य सहायता की अपील
दरअसल, यह बयान ऐसे समय आया है जब वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने मॉस्को से सीधी सैन्य सहायता की अपील की है। उनकी मांग में रूसी-निर्मित सुखोई फाइटर जेट्स की मरम्मत, रडार सिस्टम के अपग्रेड और मिसाइल डिफेंस सिस्टम की डिलीवरी शामिल है।
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मादुरो सरकार की यह अपील, अमेरिका द्वारा कैरिबियाई क्षेत्र में हाल के महीनों में बढ़ाई गई सैन्य मौजूदगी के बाद आई है। अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ने सितंबर से अब तक कम से कम 14 सैन्य ऑपरेशन किए हैं, जिनमें कई संदिग्ध ड्रग तस्करों की मौत हुई।
शासन परिवर्तन की साजिश
सूत्रों के अनुसार, CIA को वेनेजुएला में ‘covert operations’ यानी गुप्त अभियानों की अनुमति भी दी गई है। इसने काराकास को चिंतित कर दिया है। मादुरो का आरोप है कि वॉशिंगटन उनकी सरकार को अस्थिर करने और शासन परिवर्तन की साजिश रच रहा है।
ट्रंप प्रशासन ने पहले ही यह संकेत दिया था कि सैन्य विकल्प खुले हैं, अगर मादुरो प्रशासन ने अमेरिकी हितों के खिलाफ कदम उठाए। ऐसे हालात में, वेनेजुएला ने मॉस्को से रक्षा सहयोग मांगा है ताकि अमेरिकी दबाव का संतुलन बनाया जा सके।
रूस पहले भी दे चुका है मदद
विश्लेषकों का मानना है कि अगर रूस सक्रिय रूप से वेनेजुएला को मदद देता है, तो यह कैरिबियाई क्षेत्र में नई कोल्ड वॉर जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। रूस पहले भी वेनेजुएला को आर्थिक और ऊर्जा सहायता दे चुका है। लेकिन इस बार मामला प्रत्यक्ष सैन्य सहयोग का है, जो अमेरिका को सीधे चुनौती देने जैसा माना जा रहा है।
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रूस के लिए यह रणनीतिक अवसर भी है दक्षिण अमेरिका में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का। वहीं, अमेरिका इसे अपने क्षेत्र में दखल के रूप में देख सकता है। हालांकि, रूस की सावधानी भरी भाषा यह संकेत देती है कि वह खुला सैन्य टकराव नहीं चाहता, बल्कि कूटनीतिक दबाव और सामरिक संतुलन की नीति अपना रहा है।
