रूस में WhatsApp पर संकट, क्या अब आम लोगों को बदलना पड़ेगा अपना चैटिंग ऐप? जानिए पूरा मामला
WhatsApp Ban: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की प्राइवेसी को लेकर दुनिया भर में बहस चलती रहती है। कई बार इन प्लेटफॉर्म्स की नीतियां सवालों के घेरे में आ चुकी हैं। अब इसी कड़ी में रूस ने एक बड़ा कदम उठाया है
- Written By: सिमरन सिंह
Russia WhatsApp Ban (Source. Pinterest)
Russia WhatsApp Ban: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की प्राइवेसी को लेकर दुनिया भर में बहस चलती रहती है। कई बार इन प्लेटफॉर्म्स की नीतियां सवालों के घेरे में आ चुकी हैं। अब इसी कड़ी में रूस ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाने की तैयारी कर ली है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार पहले ही Telegram पर कार्रवाई शुरू कर चुकी है और अब WhatsApp को भी देश में ब्लॉक करने की तैयारी तेज हो गई है। यह फैसला न केवल रूस के करोड़ों यूजर्स के लिए झटका साबित हो सकता है, बल्कि अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए भी बड़ी चिंता का कारण बन सकता है।
WhatsApp पर क्यों बढ़ा खतरा?
रूस और Meta के बीच तनाव अब खुलकर सामने आ गया है। प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा का हवाला देते हुए रूस ने WhatsApp को पूरी तरह ब्लॉक करने की तैयारी शुरू कर दी है। WhatsApp के स्पोकपर्सन ने पुष्टि करते हुए कहा कि रूसी अधिकारियों का मकसद स्थानीय यूजर्स को सरकारी प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट करना है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस अपने सरकारी ऐप MAX को प्रमोट कर रहा है। WhatsApp का दावा है कि उसे जानबूझकर ब्लॉक किया जा रहा है ताकि लोग सरकारी ऐप का इस्तेमाल करें। कंपनी ने MAX को एक निगरानी ऐप बताया है, हालांकि रूसी मीडिया ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।
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2022 के बाद से बदला रूस का रुख
साल 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद से रूस विदेशी टेक कंपनियों के प्रति सख्त हो गया है। रूस का आरोप है कि कई अमेरिकी कंपनियां जांच एजेंसियों के साथ डेटा साझा नहीं करतीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रूस के संचार विभाग ने WhatsApp को अपनी आधिकारिक डायरेक्टरी से भी हटा दिया है। रूस में करीब 10 करोड़ लोग WhatsApp का उपयोग करते हैं। इससे पहले Apple का FaceTime और Snapchat भी रूस में ब्लॉक किए जा चुके हैं।
कानून मानो या देश छोड़ो: पुतिन सरकार का अल्टीमेटम
रूस सरकार के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने साफ कहा है कि रूस किसी भी विदेशी कंपनी को अपनी शर्तों पर काम करने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की WhatsApp या Meta से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है, लेकिन कंपनियों को रूसी संप्रभुता और स्थानीय कानूनों का सम्मान करना होगा। पेसकोव ने कहा कि अगर Meta कानूनों का पालन करने और बातचीत के लिए तैयार है तो समझौते की संभावना है, लेकिन अड़ियल रवैया अपनाने पर वापसी का कोई मौका नहीं मिलेगा।
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Telegram पर भी सख्ती क्यों?
रूस की नियामक संस्था रोसकोमनाडजोर ने Telegram पर भी प्रतिबंध की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार का कहना है कि ऐप ने ऐसे कंटेंट को हटाने से इनकार कर दिया, जिसे सरकार आपराधिक और आतंकवादी मानती है। इसके बाद से कई यूजर्स ने Telegram के स्लो या बंद होने की शिकायत की है।
अमेरिका की बढ़ेगी टेंशन
रूस लगातार अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए अपने दरवाजे बंद कर रहा है। इससे न केवल इन कंपनियों को आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि अमेरिका और रूस के बीच तकनीकी टकराव भी बढ़ सकता है। अगर WhatsApp पर पूरी तरह बैन लागू हो जाता है, तो यह रूस की डिजिटल नीति में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव माना जाएगा।
