रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (सोर्स- सोशल मीडिया)
Sergey Lavrov Slams NATO: रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने हाल ही में अमेरिका और पश्चिमी सैन्य गठबंधन नाटो की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि नाटो में निर्णय लेने की प्रक्रिया स्वतंत्र नहीं है और अधिकतर फैसले अमेरिका के प्रभाव में लिए जाते हैं। इसके विपरीत, लावरोव ने ब्रिक्स (BRICS) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे समूहों को अधिक लोकतांत्रिक और सर्वसम्मति आधारित बताया।
रूस के एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में लावरोव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन अक्सर उन देशों द्वारा किया जाता है जिन्हें वह “वैश्विक बहुमत” कहते हैं। उनके अनुसार, ब्रिक्स, एससीओ, और सोवियत संघ के बाद बने संगठनों जैसे सीएसटीओ, ईएईयू और सीआईएस में अधिकांश फैसले आपसी सहमति से होते हैं। उन्होंने दावा किया कि इन मंचों पर किसी एक देश का वर्चस्व नहीं चलता, बल्कि सदस्य देशों के बीच संवाद और सहमति को प्राथमिकता दी जाती है।
सर्गेई लावरोव ने नाटो की आलोचना करते हुए कहा कि वहां निर्णय लेना आसान है क्योंकि अमेरिका की बात को अंतिम माना जाता है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि नाटो में अमेरिका कहता है, “चुप रहो,” और सब समझ जाते हैं कि व्यवस्था कैसे काम करती है। उनका संकेत था कि नाटो के अन्य सदस्य देश स्वतंत्र रूप से अपनी राय रखने में सीमित हैं।
उन्होंने यूरोपीय संघ (EU) पर भी निशाना साधा और कहा कि ब्रसेल्स में बैठे “गैर-निर्वाचित नौकरशाह” सदस्य देशों की चुनी हुई सरकारों को निर्देश देते हैं कि उन्हें क्या करना है, किससे व्यापार करना है और किससे नहीं। लावरोव ने हंगरी का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां के नेताओं ने ब्रसेल्स की हालिया नीतियों की खुलकर आलोचना की है।
दिसंबर 2025 में हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने भी आरोप लगाया था कि यूरोपीय संघ यूक्रेन संघर्ष को लंबा खींचने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी कर रहा है। उन्होंने कहा था कि यूरोपीय संघ में “कानून का शासन” अब “ब्रसेल्स की तानाशाही” में बदल गया है।
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इसके अलावा, लावरोव ने अमेरिका पर रूसी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाकर अनुचित प्रतिस्पर्धा करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि अमेरिका भारत सहित अन्य ब्रिक्स देशों के साथ रूस के व्यापार, निवेश और सैन्य-तकनीकी सहयोग को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।