सब्जी नहीं, ये तो सोना है! इस देश में चिकन-मटन से भी महंगा बिक रहा है एक किलो खीरा, कीमतों ने तोड़ा रिकॉर्ड
Cucumber Prices In Russia: रूस में खीरे की कीमतें आसमान छू रही हैं, जो अब मीट और लग्जरी फलों से भी महंगी हो गई हैं। युद्ध, लेबर की कमी और टैक्स वृद्धि ने इस संकट को और गहरा दिया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
रूस में खीरे की कीमतें बढ़ीं, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Russia News In Hindi: जहां पूरी दुनिया में इन दिनों सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर चर्चा हो रही है, वहीं रूस में एक ऐसी चीज के दाम बढ़ गए हैं जिसने आम जनता से लेकर राजनेताओं तक को हैरान कर दिया है। रूस में खीरे की कीमतें इतनी तेजी से बढ़ी हैं कि अब इसकी तुलना लग्जरी वस्तुओं और सोने से की जा रही है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर एक नई बहस छिड़ गई है और लोग ‘डार्क ह्यूमर’ का सहारा लेकर सरकार पर तंज कस रहे हैं।
मीट और लग्जरी फलों से भी महंगा खीरा
इंडिपेंडेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस में खीरे के दाम दिसंबर से अब तक दोगुने हो चुके हैं। वर्तमान में खीरे लगभग 300 रूबल (करीब 356 भारतीय रुपये) प्रति किलो की दर से बिक रहे हैं। कुछ इलाकों में तो इसकी कीमत इससे भी दो-तीन गुना ज्यादा है। ‘फोर्ब्स रूस’ ने जानकारी दी है कि फरवरी की शुरुआत में खीरे की कीमत सुपरमार्केट में मिलने वाले मीट और बाहर से आने वाले केले जैसे फलों के बराबर या उनसे भी ज्यादा हो गई है।
सोशल मीडिया पर ‘सुनहरे’ खीरे का ट्रेंड
रूसी नागरिकों ने बढ़ती महंगाई पर अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है। एक यूजर ने खीरे की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि एक समय था जब अंडे सुनहरे हुआ करते थे लेकिन अब खीरे सुनहरे हो गए हैं। लोग अब खीरे की तुलना किसी कीमती धातु से करने लगे हैं।
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सियासी गलियारों में गूंजा खीरे का मुद्दा
यह मामला सिर्फ किचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीति में भी पहुंच गया है। ‘जस्ट रशिया’ पार्टी के नेता सर्गेई मिरोनोव ने सरकार की इस दलील की आलोचना की है कि ये कीमतें ‘सीजनल’ कारकों की वजह से बढ़ी हैं। मिरोनोव ने तंज कसते हुए पूछा कि पिछले साल ‘सुनहरे आलू’ के बाद अब ये ‘सोने के खीरे’ क्या नई खास चीज हैं? उन्होंने कहा कि अगर लोग बुनियादी भोजन भी नहीं खरीद सकते, तो यह स्थिति बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।
आसमान छूती कीमतों के पीछे के कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, इस महंगाई के पीछे रूस-यूक्रेन युद्ध और बदलती अर्थव्यवस्था एक बड़ी वजह है। रूस की अर्थव्यवस्था अब पूरी तरह से ‘मिलिट्री फोकस्ड’ हो गई है, जिससे नॉन-मिलिट्री सेक्टर में कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
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पहले सरकार ग्रीनहाउस इंडस्ट्री को भारी सब्सिडी देती थी लेकिन युद्ध के कारण हुई सैनिकों की भर्ती से लेबर की भारी कमी हो गई है। इसके अलावा, 1 जनवरी 2026 से वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) में 20% से बढ़ाकर 22% की वृद्धि ने भी आम उपभोक्ता की जेब पर दबाव बढ़ा दिया है। फिलहाल, रूस के एंटी-मोनोपॉली रेगुलेटर ने किसानों और ग्रोसरी चेन से कीमतों में इस अचानक बढ़ोतरी का कारण बताने को कहा है। खुदरा विक्रेताओं को उम्मीद है कि अगले महीने मौसम गर्म होने पर उत्पादन बढ़ेगा और कीमतों में कुछ कमी आएगी।
