

Pakistan Role In Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे गंभीर विवाद में अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस जंग को शांत करने के लिए पाकिस्तानी आर्मी चीफ Asim Munir पर बड़ा भरोसा जताया है। ट्रंप ने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल Asim Munir को बातचीत के लिए एक अहम मध्यस्थ के रूप में चुना है। हालांकि, अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने ट्रंप प्रशासन को इस चौंकाने वाले फैसले के खिलाफ कड़ी चेतावनी भी जारी कर दी है।
अमेरिकी समाचार चैनल फॉक्स न्यूज की एक नई और अहम रिपोर्ट में कई बड़े और सनसनीखेज खुलासे किए गए हैं। इस खास रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने Asim Munir को ट्रंप प्रशासन के लिए एक बहुत बड़ा जोखिम करार दिया है। अधिकारियों का साफ तौर पर मानना है कि पाकिस्तानी आर्मी चीफ की यह रहस्यमयी दोहरी भूमिका अमेरिकी हितों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ी चिंता का विषय Asim Munir के ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व के साथ पुराने और गहरे संबंध हैं। रिटायर्ड पाकिस्तानी जनरल अहमद सईद ने भी यह स्वीकार किया है कि Asim Munir के कई अहम ईरानी अधिकारियों के साथ घनिष्ठ व्यक्तिगत रिश्ते रहे हैं। इन करीबी रिश्तों में मारे जा चुके कुद्स फोर्स के कमांडर कासिम सुलेमानी और आईआरजीसी कमांडर हुसैन सलामी का नाम भी प्रमुखता से शामिल है।
इन सभी गंभीर चिंताओं और खुफिया चेतावनियों के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व की जमकर तारीफ कर रहे हैं। उन्होंने एक सार्वजनिक मंच से Asim Munir को अपना बेहद पसंदीदा फील्ड मार्शल बताकर पूरी दुनिया के कूटनीतिक जानकारों को काफी हैरान कर दिया है। बीते महज दो महीने के छोटे से समय में आसिम मुनीर और डोनाल्ड ट्रंप के बीच दो बार अहम मुलाकात भी हो चुकी है जो काफी महत्व पूर्ण है।
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसिस के विशेषज्ञ बिल रोगियो ने अमेरिका को पाकिस्तान पर बिल्कुल भी भरोसा ना करने की सख्त सलाह दी है। उनका स्पष्ट कहना है कि इतिहास के पन्नों को गहराई से खंगालकर देखें तो अफगानिस्तान के मामले में पाकिस्तान का पुराना रिकॉर्ड बहुत ही खराब रहा है। पाकिस्तान ने वहां हमेशा आतंकवादी संगठन तालिबान का पूरा समर्थन किया और दूसरी तरफ अमेरिका से खूब आर्थिक मदद भी हासिल करके उसे धोखा दिया।
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता के बुरी तरह विफल होने के तुरंत बाद आसिम मुनीर ने हाल ही में ईरान की राजधानी तेहरान का दौरा किया। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी यह साफ इशारा किया है कि यदि अगली महत्वपूर्ण बातचीत फिर से इस्लामाबाद में होती है तो वह वहां खुद जरूर जा सकते हैं। पर्दे के पीछे चल रही इस पूरी जटिल कूटनीति के बावजूद मिडिल ईस्ट में एक भयानक महाजंग के और ज्यादा भड़कने की पूरी आशंका बनी हुई है।
अमेरिका के कई शीर्ष और जिम्मेदार खुफिया अधिकारियों ने इस पूरे गंभीर मामले पर अपनी गहरी चिंता एक बार फिर से खुलकर व्यक्त की है। उनका स्पष्ट रूप से कहना है कि आईआरजीसी के साथ मुनीर के पुराने संबंध ट्रंप प्रशासन के लिए खतरे की एक बहुत बड़ी घंटी साबित होने चाहिए। कुल मिलाकर यह पूरी स्थिति अमेरिका, पाकिस्तान और ईरान के बीच बुरी तरह उलझे हुए रणनीतिक संबंधों को पूरी दुनिया के सामने स्पष्ट रूप से उजागर करती है।