कतर और ईरान के बीच समझौते की चर्चा तेज (सोर्स- सोशल मीडिया)
Qatar-Iran Silent Deal: मिडिल ईस्ट में ईरान के हमलों के बीच कतर और ईरान के बीच एक कथित “साइलेंट डील” की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि इस समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके संभावित असर जमीन पर दिखाई देने लगे हैं। कहा जा रहा है कि इस डील के बाद ईरान ने कतर पर अपने हमलों में कमी लाई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस डील के तहत अगर ईरान कतर के तेल और गैस ठिकानों को निशाना नहीं बनाता, तो उसे करीब 6 बिलियन डॉलर दिए जा सकते हैं। यह रकम पहले 2023 में अमेरिका के जरिए एक कैदी समझौते के तहत जुड़ी थी। अब अटकलें हैं कि यह राशि ईरान की सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) तक पहुंच सकती है, जो इस पूरे संघर्ष में अहम भूमिका निभा रही है।
इस संभावित समझौते के तीन बड़े असर सामने आए हैं। पहला, कतर ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका-ईरान संघर्ष में किसी भी तरह की मध्यस्थता नहीं करेगा। गौरतलब है कि कतर पहले तालिबान और अमेरिका के बीच दोहा में हुए समझौते में अहम मध्यस्थ रहा था, लेकिन इस बार उसने दूरी बना ली है।
दूसरा, कतर ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि यह जंग उसका नहीं है और वह न तो ईरान पर हमला करेगा और न ही अमेरिका की सैन्य मदद करेगा। इस बयान से यह साफ संकेत मिला है कि कतर ने खुद को इस संघर्ष से अलग रखने की रणनीति अपनाई है।
तीसरा और सबसे अहम असर यह दिखा कि 20 मार्च के बाद से ईरान ने कतर पर कोई बड़ा हमला नहीं किया है। इससे पहले रास लाफान औद्योगिक शहर जैसे महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया गया था, लेकिन उसके बाद हमले थम गए हैं।
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हालांकि, इस कथित डील के बावजूद कतर को नुकसान उठाना पड़ा है। ईरानी हमलों में उसके नागरिकों की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर है। साथ ही, कतर की गैस उत्पादन क्षमता पर भी असर पड़ा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।