एक व्यक्ति भी जीवित बचा तब भी… पाक सेना की गोलीबारी के बीच JAAC का बड़ा ऐलान, 48 घंटे में 31 की मौत
PoK Protests: पीओके में हालात बेकाबू हो गए हैं। पिछले 48 घंटों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 31 नागरिकों की मौत हुई है, जिससे 5 जून से अब तक कुल मृतकों की संख्या 80 पार कर गई है।
- Written By: अमन उपाध्याय
PoK में पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
PoK Protests Death Toll: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में पाकिस्तानी हुकूमत और सुरक्षा बलों के खिलाफ जारी जनआंदोलन अब एक खूनी संघर्ष में तब्दील हो चुका है। पिछले 48 घंटों के भीतर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की बर्बर कार्रवाई में कम से कम 31 नागरिकों के मारे जाने की खबर है।
इस हिंसा के बाद 5 जून से शुरू हुए इस आंदोलन में जान गंवाने वालों की कुल संख्या 80 से अधिक हो गई है। भारी दमन के बावजूद, प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रही ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) ने स्पष्ट कर दिया है कि वे पीछे नहीं हटेंगे और उनका मुजफ्फराबाद मार्च जारी रहेगा।
जुल्म के खिलाफ मुजफ्फराबाद कूच
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के वरिष्ठ नेताओं ने पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों पर निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है। कमेटी के नेता सरदार उमर नजीर कश्मीरी ने कहा कि आंदोलन को दबाने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है, लेकिन आवाम झुकने को तैयार नहीं है।
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वहीं, एक अन्य नेता सरदार अमन कश्मीरी ने ऐलान किया कि यदि केवल एक व्यक्ति भी जीवित बचा, तब भी मुजफ्फराबाद तक मार्च निकाला जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह संघर्ष पाकिस्तानी कब्जे से आजादी मिलने तक जारी रहेगा।
PoK protests group has publicly confirmed at least 20 deaths in Rawalakot, while wider reports have placed the combined toll across Rawalakot and Mirpur as high as 31. #PoJKProtests #Rawalakot #PakistanCrackdown pic.twitter.com/F1gRkUlSS6 — Navya (@Navya_pavi) July 29, 2026
मीरपुर में नमाज के दौरान फायरिंग
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मीरपुर की बिलाल मस्जिद में नमाज के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की। इस घटना में खारियां क्षेत्र के इमाम, मौलाना इनायतुल्लाह के सिर में गोली लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हालांकि, इस घटना की आधिकारिक पुष्टि होना अभी शेष है, लेकिन इसने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
मीडिया पर पाबंदी
PoK में जारी इस कोहराम के बीच पाकिस्तान सरकार पर स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने के आरोप लग रहे हैं। जियो न्यूज के वरिष्ठ पत्रकार शहजाद इकबाल ने दावा किया है कि मीडिया को हिंसा प्रभावित इलाकों में स्वतंत्र रिपोर्टिंग की अनुमति नहीं दी जा रही है।
उन्होंने सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाए जिसमें प्रदर्शनकारियों को ‘भारत समर्थित’ बताया जा रहा है। इकबाल ने पूछा कि यदि ये लोग दुश्मन के इशारे पर काम कर रहे थे, तो सरकार ने उनकी 38 में से 36 मांगों को क्यों स्वीकार किया? उन्होंने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर छिपा लेने से हकीकत नहीं बदलती।
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हालात बेहद तनावपूर्ण
फिलहाल PoJK में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। एक तरफ जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी लगातार नागरिकों की मौत का आंकड़ा जारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार की ओर से इन मौतों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्वतंत्र पुष्टि के अभाव और मीडिया पर प्रतिबंधों के कारण क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता गहराती जा रही है।
